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हिम्मत है तो नीतीश बिहार में RSS पर बैन लगाकर दिखाएं : सुशील मोदी

पटना : जदयू के क़ौमी सदर और वजीरे आल नीतीश कुमार के ‘संघ मुक्त’ भारत के ऐलान पर भाजपा के सीनियर लीडर सुशील कुमार मोदी ने पीर को कहा कि अगर हिम्मत है तो वजीरे आला बिहार में संघ पर बैन लगाये। बिहार विधान परिषद में ओपोजीशन के लीडर सुशील ने एक प्रेस रिलीज़ जारी कर इल्ज़ाम लगाया कि आवाम ने भूख-प्यास, मुजरिमों के डर और बदउनवान से आज़ादी दिलाने के लिए नीतीश कुमार को जनादेश दिया लेकिन इन सारे मुद्दों पर अपनी नाकामयाबी से जेहन हटाने के लिए उन्होंने आरएसएस जैसे देशभक्त तंजीम से आज़ादी दिलाने का शिगूफा छेड़ दिया है।

उन्होंने कहा कि वह संघ पर बैन लगाने की किरदार बना रहे हैं। कांग्रेस भी संघ पर रोक लगाकर इसका रिजल्ट देख चुकी है। अगर हिम्मत है तो वजीरे आला बिहार में संघ पर बैन लगाये। भाजपा इस चैलेंज का सामना करने को तैयार है। सुशील ने इल्ज़ाम लगाया कि संघ पर जब भी बैन लगाया गया, जन समर्थन से इसकी ताकत और बढ़ी। अयोध्या में राम मंदिर, कश्मीर में दफा 370 और मुल्क में समान आचार संहिता के मुद्दे पर संघ और भाजपा की विचारधारा पहले जैसी है। फिर भी नीतीश कुमार 17 साल तक भाजपा के साथ रहे। वे भाजपा की मदद से दो बार मरकज़ी वज़ीर बने और तीन बार वजीरे आला बने। भाजपा की विचारधारा तब भी यही थी, लेकिन नीतीश कुमार को तब संघ से कोई परहेज नहीं था।

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उन्होंने इल्ज़ाम लगाया कि 1974 के जेपी आंदोलन, 19 महीनों के आपातकाल और 1977 की जनता पार्टी में समाजवादी नीतीश कुमार संघ की विचारधारा वाले जनसंघ के साथ थे। समाजवादियों ने हमेशा हुकूमत पाने के लिए जनसंघ-भाजपा का साथ लिया लेकिन बाद में साथ छोडने के लिए संघ की विचारधारा का बहाना बनाया। सुशील ने इल्ज़ाम लगाया कि 1980 में इन लोगों ने दोहरी सदस्यता का मुद्दा उठाकर जेपी के मार्गदर्शन में बनी जनता पार्टी तोड दी और इंदिरा गांधी की वापसी का रास्ता तैयार किया।

उन्होंने इल्ज़ाम लगाया कि नीतीश कुमार ने राजग सरकार में अटल बिहारी वाजपेयी और लालकृष्ण आडवाणी की कियादत में काम किया जबकि दोनों सीनियर लीडर संघ का स्वयंसेवक होने पर गर्व करते हैं। आज वजीरे आजम बनने का ख्वाब पूरा के लिए वे संघ के खिलाफ बयानबाजी कर रहे हैं। उनके अवसरवाद को लोग अच्छी तरह समझते हैं।

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