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हीरे खरीदते वक़्त क्वालिटी की जगह साइज को ज़्यादा ध्यान में रखते हैं उत्तर भारतीय: रिपोर्ट

भारत में के चारों हिस्सों पूर्व पश्चिम उत्तर और दक्षिण भारत को अक्सर खाने के आधार पर भी बांटा जाता है। लेकिन खाने से लेकर डायमंड खरीदने पर उतार भारत के लोगों और दक्षिण भारत के लोगों में बहुत फर्क है। इंटरनेशनल जेमोलॉजिकल इंस्टीट्यूट के डायरेक्टर तहमस्प प्रिंटर के मुताबिक़ , दक्षिण भारत के खरीददारों को पत्थर की गुणों के बारे में ज्यादा जानकारी रखते हैं चाहे वह डायमंड को गहनों के रूप में खरीद रहे हो या इन्वेस्टमेंट के तौर पर। आर्टिफीसियल डायमंड मार्किट में काफी बिकते हैं लेकिन नेचुरल डायमंड की जगह कभी नहीं ले सकते।   जहाँ उत्तर भारत के लोग डायमंड को सिर्फ उसके साइज को देखते हुए ही खरीदने में यकीन रखते हैं और डायमंड को शान बनाने के लिए पहनते हैं।  वहीँ दक्षिण भारत के लोग डायमंड को खासतौर पर उसकी क्वालिटी देखते हुए खरीदते हैं चाहे वह साइज में  कितना भी छोटा क्यों न हो। प्रिंटर के मुताबिक़ पूर्व भारत के लोग मिलजुली सोच से डायमंड की ख़रीदारी करते हैं और पश्चिम भारत की मार्किट तो बहुत ही विविध है। भारत जेम्स और जेवेल्लरी के सबसे बड़े एक्सपोर्टर्स में से एक है और यह इंडस्ट्री भारत की इकॉनमी को बढ़ाने में हमेशा से एक ख़ास भूमिका निभाती रही है। यह देश के कुल विदेशी मुद्रा भंडार के लिए एक बड़ा हिस्सा योगदान देता है। आपको बता दें कि अमेरिका, यूएई, रूस, सिंगापुर, हांगकांग, लैटिन अमेरिका और चीन ने भारतीय जेवेल्लरी का सबसे ज्यादा आयात कर रहे हैं। प्रिंटर के अंदाज़े को मान जाए तो  2014-2019 में भारत जेम्स और जेवेल्लरी बाजार का  15.95 प्रतिशत की चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि दर से बढ़ने की उम्मीद है और इसके साथ ही उनका मानना है कि केंद्र सरकार का काले धन के ऊपर करवाई करने या न करने से इस मार्किट पर कोई असर नहीं पड़ सकता क्यूंकि भारतीय लोगों बहुत से मुसीबतों का डट कर सामना किया है और उनसे लड़ते हुए आगे बढ़े हैं।

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