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हुकूमत पार्लीमेंट में तमाम मौज़ूआत पर मुबाहिस के लिए तैयार: कमल नाथ

नई दिल्ली, २३ नवंबर, ( पीटीआई) हुकूमत ने आज एक अहम बयान जारी करते हुए कहा कि पार्लीमेंट के सरमाई इजलास में मुम्किना तौर पर तमाम मौज़ूआत पर तफ़सीली मुबाहिसा किया जाएगा लेकिन दूसरी तरफ़ अपोज़ीशन को इस बात के लिए मौरिद इल्ज़ाम ठहराया कि कि

नई दिल्ली, २३ नवंबर, ( पीटीआई) हुकूमत ने आज एक अहम बयान जारी करते हुए कहा कि पार्लीमेंट के सरमाई इजलास में मुम्किना तौर पर तमाम मौज़ूआत पर तफ़सीली मुबाहिसा किया जाएगा लेकिन दूसरी तरफ़ अपोज़ीशन को इस बात के लिए मौरिद इल्ज़ाम ठहराया कि किस मौज़ू पर कब बात की जाए, किस वक़्त बात की जाए, इसका इसरार करना ज़रूरी नहीं।

वज़ीर बराए पारलीमानी उमोर (parliamentary affairs minister) कमल नाथ ने पार्लीमेंट के बाहर अख़बारी नुमाइंदों से बात करते हुए कहा कि आज पार्लीमेंट के सरमाई इजलास का पहला दिन है। किसी भी पार्टी को इस तरह का बरताव नहीं करना चाहीए कि आज पहला नहीं बल्कि आख़िरी दिन है।

जब उन से पूछा गया कि रीटेल में एफडी आई के मौज़ू पर आया हुकूमत मुबाहिसा के लिए तैयार है जो दरअसल ज़ाबता 184 के तहत होनी चाहीए जिस में वोटिंग होती है, तो उन्होंने जवाब देते हुए कहा कि इस के बारे में स्पीकर को इज़हार-ए-ख़्याल करना चाहीए। ज़ाबता के इलावा हमें रवायात को भी मल्हूज़ रखना होगा।

हम ये नहीं कह सकते कि हमें फ़लां ज़ाबता के तहत मुबाहिस करना चाहीए या फिर फ़लां दिन या फ़लां वक़्त मुबाहिसा करना चाहीए। ऐसा कहना ग़ैर मुनासिब है। वक़्त के ताय्युन का इसरार बेमानी है। कमल नाथ के हमराह इस वक़्त मुमलिकती वुज़रा राजीव शुक्ला और पवन सिंह घटोर भी मौजूद थे।

अपनी बात जारी रखते हुए उन्होंने कहा कि ऐवान में हुकूमत किसी भी मौज़ू पर मुबाहिस के लिए तैयार है बशर्ते कि वो पारलीमानी तरीका-ए-कार के ज़ाबतों के मुताबिक़ हो। हमें ऐसी कोई हरकत नहीं करनी चाहीए जिस से मुल्क के अवाम को ये ग़लतफ़हमी हो कि हम ग़ैर ज़िम्मादाराना हरकतें कर रहे हैं।

चाहे वो ग़ैर ज़िम्मादाराना हरकतें हुकूमत से सरज़द हो या अपोज़ीशन से, अवाम की नज़र में क़ाइदीन की वक़ात ज़रूर कम हो जाती है। याद रहे कि पार्लीमेंट में किसी मौज़ू पर मुबाहिस के भी कुछ आदाब होते हैं।

अपोज़ीशन या हुक्मराँ जमात इस मुआमला में अपनी मनमानी नहीं कर सकते। इस सिलसिला में स्पीकर या सदर नशीन के अहकामात को भी मद्द-ए-नज़र रखना ज़रूरी होता है।

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