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हुसूल आराज़ीयात आर्डीनेंस की दुबारा इजराई

नई दिल्ली अदालत में पीर को समाअत । हुकूमत पर दस्तूरी अख़लाक़ीयात के उसूलों को तर्क करने का इल्ज़ाम

नई दिल्ली

अदालत में पीर को समाअत । हुकूमत पर दस्तूरी अख़लाक़ीयात के उसूलों को तर्क करने का इल्ज़ाम

सुप्रीम कोर्ट ने आज इस बात से इत्तेफ़ाक़ करलिया कि किसानों की तनज़ीमों की दरख़ास्त पर पीर को समाअत की जाये जिस में नरेंद्र मोदी हुकूमत की जानिब से हुसूल आराज़ीयात के आर्डीनेंस की दुबारा इजराई की क़ानूनी हैसियत को चैलेंज किया गया है। चीफ जस्टिस एच एल दत्त और जस्टिस अरूण मिश्रा पर मुश्तमिल एक बेंच ने कहा कि इस दरख़ास्त पर पीर को समाअत की जाएगी।

सीनियर‌ वकील इंदिरा जय‌ सिंह ने किसानों की तनज़ीमों की जानिब से अदालत में पेश होते हुए इस दरख़ास्त की जल्द समाअत पर ज़ोर दिया। किसान तनतेमों ने अपनी कल पेश करदा दरख़ास्त में इस आर्डीनेंस की दुबारा इजराई को चैलेंज किया है और उसे गैर दस्तूरी क़रार देते हुए कहा कि मर्कज़ी हुकूमत ने अपने इख़्तियारात का रंगा रंग इस्तेमाल किया है और इस ने क़ानूनसाज़ इदारों को नज़रअंदाज किया है।

ये दरख़ास्त भारतीय किसान यूनीयन ग्राम सेवा समीति दिल्ली ग्रामीण समाज और चोगमा विकास अवाम की जानिब से पेश की गई है जिस में अदालत से इस्तिदा की गई है कि हुकूमत को हुसूल आराज़ीयात बिल के इस आर्डीनेंस पर किसी तरह की कार्रवाई और अमल से रोक दिया जाये।

किसान तनज़ीमों का इद्दिआ था कि हुकूमत की जानिब से पार्लियामेंट के क़ानूनसाज़ी के अमल को नज़रअंदाज करते हुए बारहा आर्डीनेंस जारी करना दर असल ना सिर्फ़ बहीमाना और दस्तूर की मुख़ालिफ़त है बल्कि ये दस्तूर के साथ ख़ुद धोका है। इन तनज़ीमों का कहना है कि हुकूमत की जानिब से दुबारा आर्डीनेंस की इजराई नापाक अज़ाइम पर मबनी है इसी लिए इस इक़दाम को चैलेंज किया जा रहा है।

इस दरख़ास्त में कहा गया है कि हुकूमत ने हुसूल आराज़ीयात बिल की लोक सभा में मंज़ूरी के बाद 10 ता 20 मार्च इस बिल को राज्य सभा में मुबाहिस के लिए उम्दा पेश नहीं किया क्योंकि इस के पास ऐवान में दरकार अरकान की ताईद नहीं है। इन तनज़ीमों ने कहा कि इस बिल पर सियासी इत्तेफ़ाक़ राय भी नहीं है।

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