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हैदराबाद को आलमी म्यार का बनाने मकानात की नंबर अंदाज़ी ज़रूरी

शहर हैदराबाद में मौजूद मकान नंबरात को असरी और आसान बनाने का मन्सूबा अर्से दराज़ से तात्तुल का शिकार बना हुआ है। साल 2011 में भी मजलिसे बल्दिया अज़ीमतर हैदराबाद ने इस मन्सूबा का अज़सरे नव आग़ाज़ करने का ऐलान किया था लेकिन ताहाल मन्सूबा में किसी किस्म की पेशरफ्त होती नज़र नहीं आ रही है।

इस से क़ब्ल भी जी एच एम सी की जानिब से हैदराबाद में मौजूद तमाम मकान नंबरात की तबदीली और आसान नंबरात की फ़राहमी का ऐलान किया गया था जिस पर अमल आवरी मुम्किन नहीं हो पाई।

1990 की दहाई में भी बल्दिया की जानिब से शहर के मकानों पर नंबरात आवेज़ां किए गए थे और इलाक़ा वारी असास पर उन्हें तफ़वीज़ किया गया था और इस सिलसिला में नंबरात लगाने पर लाखों रुपय ख़र्च किए गए थे।

इस मन्सूबा में हुई नाकामी के बाद बल्दी ओहदेदारों ने एक मर्तबा फिर उस मन्सूबा को काबुल अमल बनाने के लिए माहिरीन से मुशावरत की लेकिन हर मर्तबा ये मुशावरत नाकाम साबित होती रही।

साल 2011 में मजलिसे बल्दिया अज़ीमतर हैदराबाद की जानिब से दोनों शहरों हैदराबाद और सिकंदराबाद के इलावा जी एच एम सी हुदूद में मौजूद गलीयों के लिए नंबर की तख़सीस के साथ मकान नंबरात की हवालगी को यक़ीनी बनाने का मन्सूबा तैयार किया गया था।

इस वक़्त के कमिशनर जी एच एम सी मिस्टर एमिटी कृष्णा बाबू ने बाज़ाबता ऐलान करते हुए कहा था कि हर मकान के लिए अलाहिदा मुनफ़रद नंबर दिया जाएगा ताकि मकान नंबरात को बाआसानी तलाश किया जा सके।

आलमी म्यार के शहरों में पता बिलख़ुसूस मकान नंबर बाआसानी बताया जा सकता है इसी लिए शहर हैदराबाद को आलमी म्यार के शहरों में शामिल करने के लिए ये ज़रूरी है कि शहर के मकान और दूकान को आसान पते फ़राहम करने के इक़दामात यक़ीनी बनाए जाएं।

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