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हज़रत रबी बिन काब को दिन रात ख़िदमत हबीब कीब्रीया का एज़ाज़

अल्लाह के रसूल‌ से सच्ची मुहब्बत-ओ-वाबस्तगी दरअसल अल्लाह ताला की अता ए ख़ास और सरफ़राज़ी है इस का सबूत इताअत हक़तआला और हुज़ूर अनवर की कामिल पैरवी के ताबनाक अमली नमूनों से मिलता है सहाबा किराम की मुबारक ज़िंदगियां उन्ही हक़ायक़ की शारेह

अल्लाह के रसूल‌ से सच्ची मुहब्बत-ओ-वाबस्तगी दरअसल अल्लाह ताला की अता ए ख़ास और सरफ़राज़ी है इस का सबूत इताअत हक़तआला और हुज़ूर अनवर की कामिल पैरवी के ताबनाक अमली नमूनों से मिलता है सहाबा किराम की मुबारक ज़िंदगियां उन्ही हक़ायक़ की शारेह और ता क़यामत अहल सआदत को जादा मुहब्बत ख़ुदा‍ ओर ऱसूल‌ पर गामज़न रखने और इताअत-ओ-इत्तिबा के उजालों से मुशर्रफ़ करते रहने का मूजिब-ओ-सबब हैं।

सहाबा किराम के नज़दीक रसूल उल्लाह के जमाल अक़्दस का दीदार, हुज़ूर अकरम‌ की ख़िदमत की सआदत हासिल करना , आप की फ़रमांबर्दारी, आप पर जां निछावर करना और आप की ख़ुशनुदी पाना सब से बड़ी नेमत थी अल्लाह ताला के फ़ज़ल-ओ-करम से सारे सहाबा इस इनाम ख़ास से मालामाल थे जिन के मिनजुमला हज़रत रबी बिन काब का इस्म ए गिरामी भी मिलता है जिन्हों ने अपने आप को रसूल उल्लाह की ख़िदमत के लिए वक़्फ़ कर दिया और हमा वक़त इस सआदत से बहरामंद होते रहे।

डाक्टर सय्यद मुहम्मद हमीद उद्दीन शरफ़ी डाइरेक्टर आई हरक ने आज सुबह ९ बजे इवान ताज उलउरफा हमीदाबाद वाके शरफ़ी चमन ,सब्ज़ी मंडी और 11 बजे दिन जामा मस्जिद महबूब शाही , मालाकुंटा रोड,रूबरू मुअज़्ज़म जाहि मार्किट में इस्लामिक हिस्ट्री रिसर्च कौंसल इंडिया ( आई हरक) के ज़ेर एहतिमाम मुनाक़िदा९८५वीं तारीख इस्लाम इजलास के पहले सेशन में अहवाल अनबिया-ए-अलैहिम स्सलाम के तहत हज़रत मूसा अलैहि स्सलाम के अहवाल मुक़द्दसा और दूसरे सेशन में एक मुहाजिर एक अंसारी सिलसिला के ज़िमन में सहाबी रसूल हज़रत रबि बिन काब के हालात मुबारका पर तोसिई लकचर दीए।

किराअत ए कलाम पाक, हमद बारी ताला,नाअत शहनशाह कौनैन से कार्रवाई का आग़ाज़ हुआ।मौलाना सय्यद मुहम्मद सैफ उद्दीन हाकिम हमीदी कामिल निज़ामीया ने एक आयत जलीला का तफ़सिरी, एक हदीस शरीफ का त्शरीही और एक फ़िक़ही मसला का तोजिही मुतालआती मवाद पेश किया बादा डाक्टर सय्यद मुहम्मद हसीब उद्दीन हमीदी ज्वाइंट डाइरेक्टर आई हरक ने इंग्लिश लकचर सीरीज़ के ज़िमन में हयात तैयबा के मुक़द्दस मौज़ू पर अपना ७३५ वां सिलसिला वार लकचर दिया।

डाक्टर हमीद उद्दीन शरफ़ी ने सिलसिला कलाम को जारी रखते होए कहा कि हज़रत रबि बिन काब वही अज़ीम सहाबी और हुज़ूर स.व. के मुक़र्रब ख़ादिम ख़ास हैं जिन्हों ने रसूल उल्लाह से मारूज़ा किया था कि जन्नत में आपऐ मुझे अपने साथ रखिए।

हज़रत रबि बिन काब बिन मालिक अस्लमी थे और उन की कुनिय्यत अबू फिरास थी। हज़रत रबि का शुमार अहल हिजाज़ में है। रसूल उल्लाह के मक्का मुकर्रमा से हिज्रत फ़र्मा हो कर मदीना मुनव्वरा रौनक अफ़रोज़ के बाद उन्हें शरफ़ इस्लाम नसीब हुआ। हुज़ूर की ख़िदमत में हाज़िरी और जमाल अक़्दस का मुशाहिदा करने दौलत अमान पाने के बाद एक अहम फैसला ये कर लिया कि अब दर दौलत छोड़कर कहीं नहीं जाएंगे।हुजुर‌ अकरम की ख़िदमत अक़्दस में ही रहेंगे चुनांचे उन्हें असहाब-ए-सुफ़्फ़ा की मुक़द्दस जमात में शामिल होने का एज़ाज़ मिला।

रसूल उल्लाह‌ ने उन्हें एक अहम ख़िदमत तफ़वीज़ फ़रमाई वो हुज़ूर-ए-पाक के लिए वुज़ू का पानी रखने पर मामूर होए और ज़िंदगी भर इस ख़िदमत ख़ास पर मुफ़्तख़िर रहे।

डाक्टर हमीद उद्दीन शरफ़ी ने कहा कि हज़रत रबि को सरकार दो आलम से बेपनाह इशक़ और वाबस्तगी थी हुज़ूर को तकते रहना मशग़ला हयात था। हुज़ूर-ए-पाक की रहलत शरीफ के बाद मदीना मुनव्वरा में रंजीदा ख़ातिर और दिल बर्दाश्ता बसर करने लगे जब फ़िराक़ रसुल‌ में हालत ना गुफ़्ता बिहि हो गई तो क़बीला वाले उन्हें अपने साथ ले गए बड़ी तवील उम्र पाई वाक़िया हररा के बाद वफ़ात पाई।

इजलास के इख़तताम से क़बल बारगाह रिसालत में सलाम ताज उलउरफा पेश किया गया।ज़िक्र जहरी और दाये सलामती पर आई हरक के ९८५ वें तारीख इस्लाम के दोनों सेशन तकमील पज़ीर होए। मुहम्मद यूसुफ़ हमीदी ने इबतदा-ए-में खेरमक़दम किया और जनाब मुहम्मद मज़हर हमीदी ने आख़िर में शुक्रिया अदा किया।

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