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क़ियाम अमन के लिए जद्द-ओ-जहद ही हुब्बे नबवी का तक़ाज़ा

तानडूर, 05 फरवरी: ऑल इंडिया इमामस कौंसल के ज़ेरे एहतिमाम मस्जिदे उमरुन्निसा एन टी आर कॉलोनी तानडूर में जल्सा-ए-आम बउनवान हुब्बे नबवी मुनाक़िद हुआ मज़कूरा इजतिमा आम से ख़िताब करते हुए मौलाना सुहेल ने कहा कि नबी करीम से मुहब्बत का हक़ उसी

तानडूर, 05 फरवरी: ऑल इंडिया इमामस कौंसल के ज़ेरे एहतिमाम मस्जिदे उमरुन्निसा एन टी आर कॉलोनी तानडूर में जल्सा-ए-आम बउनवान हुब्बे नबवी मुनाक़िद हुआ मज़कूरा इजतिमा आम से ख़िताब करते हुए मौलाना सुहेल ने कहा कि नबी करीम से मुहब्बत का हक़ उसी वक़्त अदा किया जा सकता है कि ज़िंदगी के तमाम गोशों में आप की मुकम्मल पैरवी की जाये।

आशिक़ाने रसूल की ये ज़िम्मेदारी है कि वो मुआशरे में इंसानी हुक़ूक़ की बहाली और अदल-ओ-इंसाफ़ के क़ियाम के लिए तालीमाते नबवी की रोशनी में जद्द-ओ-जहद के लिए उठ खड़े हों। मौलाना रफीक अहमद रशादी जनरल सेक्रेटरी इमामस कौंसल ने अपने ख़ुसूसी ख़िताब में कहा कि मुसलमान की सरगर्मियां मस्जिद तक नहीं रहनी चाहीए।

बल्कि मुसलमान का फ़रीज़ा है कि सालिह और पुरअमन मुआशरे की तशकील और उस की बक़ा की जद्द-ओ-जहद करे। मौलाना ने मज़ीद कहा कि इंसानी समाज के हर मसले का हल तदाबीर इख़तियार करने में हैं ना सिर्फ़ दुआओं में, आज बातिल ताकतें दुनिया में छाई हुई है। सिर्फ़ इसी वजह से कि हक़ के अलमबर्दारों ( मुसलमानों ) की इजतिमाईयत का शीराज़ा बिखरा हुआ हैं।

अगर मुसलमान अपनी ज़िम्मेदारी को समझें तो दुनिया की तस्वीर बदल सकती है और दुनिया में क़ियाम अमन की जद्द-ओ-जहद ही हुब्बे नबवी का तक़ाज़ा है।

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