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क़ुरान एक्सपर्ट ‘प्रमोद उर्फ़ उमर’ करता है एटीएस की मदद

प्रमोद पाटिल (बदला हुआ नाम) सिर्फ़ 23 साल के थे जब वो इस्लाम के क़रीब आये. अपने कुछ दोस्तों से मिलने के बाद उनका इस्लाम की तरफ़ रूझान बढ़ा और वो इस्लाम से जुड़े सवाल उनसे करने लगे. कुछ ही दिनों में अरबी और उर्दू भी उन्होंने सीखनी शुरू कर दी थी.

बुनियाद्परस्त हिन्दू ख़ानदान से ताल्लुक़ रखने वाले पाटिल के लिए ये मुश्किल था और मिड डे की रिपोर्ट के मुताबिक़ उन्हें घर में तमाम परेशानियां भी झेलनी पड़ रही थीं.

इसलिए 2012 में उन्होंने अपना मोबाइल फ़ोन अपने घर छोड़ दिया और सारे ही सोशल मीडिया साईट से अलग हो गए और फिर अहमदाबाद चले गए जहां उन्होंने इस्लाम मज़हब अपना लिया. इसके बाद उन्होंने अपना नाम उमर रख लिया.

वो अहमदाबाद में एक मदरसा में रहने लगे, एक साल बाद उमर उत्तर प्रदेश में एक मदरसे में चले गए जहां उन्होंने साइंस, मैथमेटिक्स और इंग्लिश जैसी चीज़ें 2 साल तक वहाँ सिखायीं. उसके बाद वो अहमदाबाद आ गए.

जब वो गुजरात दुबारा आये तो उन्हें कई लोगों ने बहकाने की भी कोशिश की लेकिन वो अपने फ़ैसले पर क़ायम रहे . “लोगों ने मुझे बहकाने की हर रोज़ कोशिश की और मैंने देखा कि वो और लोगों के साथ भी यही कर रहे थे, मैंने उस वक़्त कुरता पायजामा पहेनना शुरू कर दिया था और मै लम्बी दाढ़ी भी रखने लगा था.”
सितम्बर 2015 में वो अपने ख़ानदान से मिलने गए.
अक्टूबर 2015 में उन्हें एटीएस ने उन्हें फ़ोन किया, उन्होंने मौलानाओं और आलिमों की मदद से सही और ग़लत रास्ते का फ़र्क़ बताया.
अपनी अरबी और उर्दू की समझ से वो अब एटीएस की मदद करते हैं. जब भी एटीएस उन्हें फ़ोन करती है उमर विवादित मटेरियल का तर्जुमा कर देते हैं.

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