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क़ुरान की तालीम ही से नागरीक्ता का सूधार‌ मुम्किन

हैदराबाद। जनाब अहमद इंजीनीयर सेंटर फ़ार पीस एड ट्रोमैसेज के हफ़तावारी इज्तेमा "मुआशरा की इस्लाह क्यों कर हो " के उनवान पर कहा कि क़ुरान की तालीम और रसूल अकरम स.व. की पैरवी ही से मुआशरा की इस्लाह मुम्किन है।

हैदराबाद। जनाब अहमद इंजीनीयर सेंटर फ़ार पीस एड ट्रोमैसेज के हफ़तावारी इज्तेमा “मुआशरा की इस्लाह क्यों कर हो ” के उनवान पर कहा कि क़ुरान की तालीम और रसूल अकरम स.व. की पैरवी ही से मुआशरा की इस्लाह मुम्किन है।

ये दुनिया चैन की सांस ले सकती है। इस्लाम ने ज़हनों को तब्दील करने का काम किया। इस लिए हमेशा अल्लाह की मौजूदगी का एहसास अक़ीदा तौहीद से दिल्वाया। ज़माँ और मकान के क़ैद से आज़ाद हर चीज़ पर क़ुदरत रखने वाला ख़ालिक़ की अता कर्दा ज़िंदगी महिज़ खेल-ओ-कूद के लिए नहीं दी गई, इस का हिसाब-ओ-किताब होगा।

इस दिन को यौम मह्शीर यानी तमाम इंसानों को जमा करने वाला दिन और फ़ैसला किए जाने वाला दिन बतलाया गया जहां रत्ती बराबर नेकी और बुराई का भी हिसाब लिया जाएगा

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