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क़ौम दुश्मन सरगर्मीयां नाक़ाबिल-ए-बर्दाश्त

इंदौर: जेएनयू में 9 फरवरी को मुनाक़िदा प्रोग्राम में मुख़ालिफ़ हिंद नारे बुलंद करने पर तन्क़ीद करते हुए चीफ़ मिनिस्टर मध्य प्रदेश शिव राज सिंह चौहान ने कहा है कि इज़हार-ए-ख़याल की आज़ादी के ये मायने नहीं है कि कोई क़ौम दुश्मन सरगर्मीयों में शामिल‌ हो सकता है। इंदौर में कल शब चतेरा भारती फ़िल्म फ़ैस्टीवल का इफ़्तेताह करने के बाद इन्होंने कहा कि जिस तरह हिन्दुस्तान में इज़हार-ए-ख़याल की आज़ादी है दूसरे ममालिक में नहीं है।

राय की आज़ादी के नाम क़ौम दुश्मन सरगर्मीयों को हरगिज़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। चीफ़ मिनिस्टर ने कहा कि हिन्दुस्तान ने हमेशा दुनिया को अमन और ख़ुशहाली का पयाम दिया है लेकिन मुल्क में बाज़ लोग इज़हार-ए-ख़याल की आज़ादी की नई तशरीह पेश कर रहे हैं जबकि किसी दूसरे मुल्क में इस तरह के नारे बुलंद करने की जुर्रत नहीं करसकता। अगर माज़ी में भी मीर जाफ़र और जया चंद जैसे ग़द्दार मौजूद थे|

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