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ख़लील चिशती , क़तल के इल्ज़ामात से बरी

सुप्रीम कोर्ट ने आज एक पाकिस्तानी माईक्रो बायोलोजिस्ट ख़लील चिशती को 20 साल से जारी फ़ौजदारी मुक़द्दमा में क़तल के इल्ज़ाम से बरी कर दिया और उन्हें किसी रुकावट के बगै़र पाकिस्तान वापिस होने की इजाज़त भी दे दी।

सुप्रीम कोर्ट ने आज एक पाकिस्तानी माईक्रो बायोलोजिस्ट ख़लील चिशती को 20 साल से जारी फ़ौजदारी मुक़द्दमा में क़तल के इल्ज़ाम से बरी कर दिया और उन्हें किसी रुकावट के बगै़र पाकिस्तान वापिस होने की इजाज़त भी दे दी।

ताहम अदालत-ए-उज़्मा ने 82 साला ख़लील चिशती को हिन्दुस्तानी ताज़ीरी क़ानून की दफ़ा 324 के तहत रज़ाकाराना तौर पर
ज़रब पहुंचाने का जुर्म साबित होने पर दी गई सज़ा में मुदाख़िलत करने से इनकार कर दिया।

वो इस जुर्म में सज़ा के तौर पर पहले ही सज़ाए क़ैद पारहे हैं। जस्टिस पी स़्था सीवम और जस्टिस रंजन गोगोई ने कहा कि ख़लील चिशती तक़रीबन एक साल से जेल में रहे हैं। इस तरह वो अपने जुर्म पर सज़ाए क़ैद पहले ही मुकम्मल करचुके हैं।

चिशती को क़तल के इल्ज़ाम से बरी करते हुए कहा कि उन पर हिन्दुस्तानी ताज़ीरी दफ़ा 34 के इतलाक़ की कोई गुंजाइश नहीं है क्योंके ये दफ़ा मुशतर्का इरादा पर मबनी जुर्म से ताल्लुक़ रखती है। सुप्रीम कोर्ट बंच ने ख़लील चिशती को उम्र और क़ाबिलीयत को मल्हूज़ रखते हुए हुक्काम को हिदायत की कि वो उन की बह आसानी और पुरसुकून वतन वापसी को यक़ीनी बनाने के लिए तमाम ज़रूरी इक़दामात करें।

इस बंच ने 10 मेए को जारी करदा अपने हुक्म का हवाला देते हुए कहा चूँके अब उन के ख़िलाफ़ मज़ीद कोई कार्रवाई दरकार नहीं है। लिहाज़ा पाँच लाख रुपये की रक़म ज़मानत उन्हें ( चिशती ) या उन के किसी नामज़द फ़र्द को वापिस करदी जाये।

इस मुक़द्दमे के दीगर दो मुल्ज़िमीन को जिन्हें सिर्फ़ ताज़ीरी दफ़ा 324 के तहत जुर्म का मुर्तक़िब क़रार दिया गया है रहा करने की हिदायत भी की गई है।

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