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ख़वातीन पर ज़ुल्म रोकने समाज में शऊर बेदार करना ज़रूरी

नई दिल्ली 30दिसंबर: दिल्ली में इजतिमाई इस्मत रेज़ि का शिकार लड़की की मौत पर अफ़सोस का इज़हार करते हुए मुस्लिम ख़वातीन के अहम इदारे ने मज़हबी क़ाइदीन पर ज़ोर दिया है कि वो अपने ख़ुत्बों में समाज में इस संगीन मसले के ताल्लुक़ से शऊर बेदार करें

नई दिल्ली 30दिसंबर: दिल्ली में इजतिमाई इस्मत रेज़ि का शिकार लड़की की मौत पर अफ़सोस का इज़हार करते हुए मुस्लिम ख़वातीन के अहम इदारे ने मज़हबी क़ाइदीन पर ज़ोर दिया है कि वो अपने ख़ुत्बों में समाज में इस संगीन मसले के ताल्लुक़ से शऊर बेदार करें ताकि ख़वातीन के ख़िलाफ़ ज़ुल्म के सिलसिले को रोका जा सके ।

बानी जनरल सैक्रेटरी ऑल इंडिया मुस्लिम वूमन पर्सनल लों बोर्ड परवीण आब्दी ने कहा कि वो इस काज़ के सिलसिले में आर एस एस के क़ाइदीन और दिल्ली के शाही इमाम से भी मुलाक़ात करेंगी । उन्होंने कहा कि वो बला लिहाज़ मज़हब तमाम मज़हबी क़ाइदीन और खासतौर पर मुस्लिम उलमा पर ज़ोर देती हैं कि वो अपने जुमे को ख़ुत्बों में ख़वातीन के साथ मुंसिफ़ाना और काबुल-ए-एहतिराम सुलूक की अहमियत को उजागर करें।

उन्होंने पी टी आई से फ़ोन पर बात चीत करते हुए ये बात कही । टी वी चैनलों पर भी तमाम मज़ाहिब के मुख़्तलिफ़ प्रोग्राम्स पेश किए जाते हैं। उन्होंने कहा कि वो चाहती हैं कि मज़हबी क़ाइदीन अवाम में इस संगीन मसले के ताल्लुक़ से शऊर बेदार करें और उन्हें उस की अहमियत समझाएं कि ख़वातीन को इज़्ज़त-ओ‍-एहतेराम की निगाह से देखा जाना कितना अहमियत का हामिल है ।

परवीण आब्दी ने कहा कि अब वक़्त आगया है कि तमाम तमाम इख़तिलाफ़ात से एक‌ होकर ख़वातीन के तहफ़्फ़ुज़ से मुताल्लिक़ मसाइल के लिए एक जुट होकर काम करे । उन्होंने कहा कि वो आर एस एस सरबराह मोहन भगवत ( नागपुर ) और दिल्ली की जामा मस्जिद के शाही इमाम सय्यद अहमद बुख़ारी पर भी ज़ोर देती हैं कि वो उस क़ौम पसंदाना और इंसानी काज़ के लिए अपना रोल अदा करें।

उन्होंने बताया कि ख़वातीन पर्सनल लों बोर्ड की तरफ‌ से ख़वातीन और मज़हबी क़ाइदीन से भी इंटरनेट और दूसरे वसाइल के ज़रीया राबिता किया जाएगा ताकि इस मसले पर शऊर बेदार किया जा सके । बोर्ड ने ख़ुद हवातीन पर भी ज़ोर दिया है कि वो ख़ुद पर होने वाले मज़ालिम के ख़िलाफ़ उठ खड़े हो।

परवीण आब्दी ने दिल्ली में नौजवान तालिबा की मौत पर अफ़सोस का इज़हार किया । उन्होंने कहा कि क़वानीन को सख़्त गैर बनाने और मुक़द्दमात की बसरात यकसूई के अलावा समाज में इस ताल्लुक़ से शऊर बेदार करना भी अहमियत का हामिल है ।

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