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ग़ाज़ीपुर ज़िले में ज़मानियाँ के लोगो ने दिया ‘रोड नहीं तो वोट नहीं’ का नारा

शम्स तबरेज़, ब्यूरो रिपोर्ट।
लखनऊः जब-जब चुनाव नज़दीक आता तब बरसाती मेंढक की तरह नेताओं की जय-जयकार सुनाई देने लगती है। अपने अपने इलाके को तरक्की के नए-नए आयाम गिनाने में नेताओं से ज्यादा अल्फाज़ और किसके पास हो सकते है? आज हालात ऐसे बन गए हैं, कि कोई देश को महान बनाने की बात करता है तो कोई विकास की ऐसी ऐसी परिभाषा बनाने लगता है, जिसका रिकार्ड किसी भी भाषा की डिक्सनरी में खोजना नामुमकिन है। नेताओं की चिकनी चुपड़ी बाते सुनकर तो ऐसा लगता है जैसे मानो नेता नहीं ‘राबिन हुड’ है।
अगर उत्तर प्रदेश में विकास की बात की जाए तो सबसे विकास के नाम पर हो हल्ला मचाने में समाजवादी पार्टी सबसे आगे है, जो प्रदेश के हर ज़िले में विकास के दावे करती है। गाज़ीपुर में सात विधानसभा सीटों में से छः सीटों पर समाजवादी पार्टी का परचम लहरा रहा है सोचिए कितना विकास हुआ होगा? अगर बात ज़मानियाँ विधानसभा क्षेत्र की हो तो पूर्व पर्यटन मंत्री और अखिलेश सरकार में जमानियां के मौजदा विधायक ओमप्रकाश सिंह को कौन भूल सकता है। अगर आपको गाज़ीपुर में जाना हो तो ज़मानियाँ विधानसभा क्षेत्र में ज़रूर घूमने का प्रयास करें, क्योंकि जिन लोगो का हाज़मा ठीक न हो उनको ज़मानियाँ की सड़कों पर घूमना सेहत के लिए फायदेमंद होगा। अगर कमर में दर्द हो, तो यहां की खूबसूरत सड़कों को देखकर आपका दर्द अपने आप खत्म हो जाएगा। विकास का इतना सुन्दर देखकर आपको अपना ज्ञान पर फिर से विचार करने का ज़रूरत पड़ सकती है। यहाँ की सुन्दर और प्रसिद्ध सड़कें कई गर्भवती महिलाओं का प्रसव करा चुकी हैं, तो कई बिमार को अस्पताल पहुँचने से पहले ही परलोक पहुँचा चुकी है। ज़मानियाँ की हाईटेक सड़कें देखने के बाद के बाद शायद आपको दुनिया का कोई और सड़क नज़र नहीं आएगा।
हम आपको ज़्यादा घुमाने-फिराने के मूड में नहीं हैं, यू तो पूरे ज़मानियाँ की सड़को का बुरा हाल है, अगर स्पष्ट तौर पर कहा जाए, तो यहाँ की सड़के और यहाँ के लोग खुद अपनी किस्मत पर रो रहे हैं। मामला ज़मानियाँ के नई बाज़ार ग्रामसभा का है यहाँ के लोगों ने यहाँ की महान सड़कों की हालत देखकर नेताओं के विरोध में उतर चुके है। यहाँ के लोगो ने नारा दिया है ‘रोड नहीं तो वोट नहीं’ ज़मानियाँ विधानसभा क्षेत्र के उसिया गांव के समीप गोड़सरा निवासी ‘सहाब खाँ गोड़सरावी’ ने सियासत ब्यूरो से बात करते हुए सड़को के कुछ फोटोग्राफ उपलब्ध कराए है जिसमें ग्रामीणों ने लाल रूमाल मुंह पर बांधकर और जर्जर सड़क के गड्डे में लेटकर अपना विरोध जताया है। एक फोटो में दिलदारनगर बाईपास रेलवे क्रासिंग नज़र आ रहा है जहाँ एक ट्रक पलटी हुई।
सियासत से बात करते हुए सहाब खाँ गोड़रावी ने बताया कि यहाँ अक्सर इस रोड पर कोई न कोई हादसा होता रहता है और ट्रक पलटते रहते है। ’रोड नहीं तो वोट नहीं’ का नारा लगाकर अपना विरोध जताने के लिए ज़मानियाँ नई बाज़ार के लोगों ने ये अनोखा तरीका निकाला है। चुनाव नज़दीक है और नेताओं को अब अपना-अपना मायका याद रहा है। अब नेता अपने अपने इलाके में भाग दौड़ करना शुरू कर चुके है। ऐसे में इस प्रकार का अनोखा विरोध करके लोगों को उम्मीद है कि कोई न कोई नेता उनकी समस्या सुनेगा। ज़मानियाँ विधानसभा से बसपा के टिकट पर पहली अपना किस्मत आजमाने उतरे बारा गांव के समीप बीरपुर गांव निवासी अतुल राय भी खूब चर्चा में है। सियासत ब्यूरो चीफ से बात करते हुए अतुल राय ने बताया कि “जो सड़के राज्य सरकार के दायरे में आती है उनका बहुत बुरा है।’’ सियासत से बातचीत में अतुल राय ने बताया कि “नई बाज़ार निवासियों ने ‘रोड़ नहीं तो वोट नहीं’ का नारा लगाया है, जब उनको ये सूचना मिली तो उन्होने ग्रामीणों को काफी समझाया कि ‘आप लोग वोटिंग करें’। अतुल राय ने ये भी आश्वाषन दिया कि अगर वो विधायक बनते हैं, तो इस समस्या को दूर किया जाएगा।’’
प्रदर्शन करने वालों में मोहम्मद शहाबुद्दीन खाँ, एच.आर. मैनेजर शाहिद खाँ, पूर्व प्रधान जहाँगीर खाँ, पूर्व प्रधान वाहिद खाँ उर्फ राजू खाँ, पूर्व प्रधान महेस्वी पासवान, मास्टर महमूद खाँ, अज़ीम खाँ, सुहैल खाँ, अलामुद्दीन खाँ, मास्टर तबरेज़, शमशाद खाँ, तौकीर, मकबूल, तौसीफ इत्यादि शामिल रहे।
चूंकि लोकतंत्र में जनता अपने वोट के माध्यम से अपना प्रतिनिधि चुनती है और उससे ये उम्मीद करती है कि उनका प्रतिनिधि उनकी समस्या को दूर करके विकास करेगा, लेकिन ज़मानियाँ का हाल देखकर विकास को फिर से समीक्षा करने की आवश्कता है।

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