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ग़िज़ा , पैट्रोलीयम अशीया की क़ीमतों में इज़ाफ़ा ,आलमी बोहरान का नतीजा

नई दिल्ली १० दिसम्बर ( पी टी आई) वज़ीर फ़ीनानस परनब मुकर्जी ने आज कहा कि ग़िज़ा और पैट्रोलीयम अशीया की क़ीमतों में इज़ाफ़ा, आलमी मआशी सुस्त रफ़्तारी का नतीजा है।

नई दिल्ली १० दिसम्बर ( पी टी आई) वज़ीर फ़ीनानस परनब मुकर्जी ने आज कहा कि ग़िज़ा और पैट्रोलीयम अशीया की क़ीमतों में इज़ाफ़ा, आलमी मआशी सुस्त रफ़्तारी का नतीजा है।

इस से मुल़्क की मजमूई पैदावार पर असर पड़ा है। तिजारती सरगर्मीयां कम होगई हैं, ग़िज़ाई इफ़रात-ए-ज़र और ईंधन की क़ीमतें बढ़ गई हैं, आलमी मआशी सुस्त रफ़्तारी के बाइस कई उभरती हुई मईशतों की मआशी रफ़्तार मुतास्सिर रही है।

तीसरे हिंद अफ़्रीक़ी हाईड्रो कार्बन कान्फ़्रैंस से ख़िताब करते हुए परनब मुकर्जी ने कहा कि हम मुश्किल दूर से गुज़र रहे हैं। आलमी मईशत कुछ बेहतरी की तरफ़ बढ़ रही है लेकिन इस का अहया ग़ैर यक़ीनी दिखाई दे रहा ही। इस के इलावा एक और आलमी कसादबाज़ारी का इमकान है।

मशरिक़-ए-वुसता में सियोल बदअमनी ने इस ग़ैर यक़ीनी कैफ़ीयत को मज़ीद अबतर बना दिया है। ख़ासकर बैन-उल-अक़वामी तेल की क़ीमतों में इज़ाफ़ा हुआ है। अमरीका पर ग़ैरमामूली तौर पर क़र्ज़ का बोझ बढ़ गया ही। वहां मआशी सुस्त रफ़्तारी के इलावा बेरोज़गारी में भी इज़ाफ़ा हो रहा है।

यूरोप में मुक़तदिर आली क़र्ज़ बोहरान के जारी रहने से उभरती हुई मईशतों को धक्का पहुंचा है। उन्हों ने इस बात को तस्लीम करते हुए कहा कि मुल़्क की पैदावारी शरह 7 फ़ीसद है जो ग़ैर मुनासिब है। इस ख़सूस में सरमाया कारी की फ़िज़ा-ए-को बेहतर बनाना ज़रूरी है। उन्हों ने अपोज़ीशन से तआवुन की अपील की। हुकूमत पैदावार को फ़रोग़ देने के लिए अपनी कोशिशें जारी रखी हैं जबकि वो इफ़रात-ए-ज़र पर भी क़ाबू पा रही है।

ये इफ़रात-ए-ज़र दो हिन्दसी के क़रीब पहुंच चुका है। अगरचे कि ग़िज़ाई अशीया की क़ीमतों में कमी का रुजहान पाया जा रहा ही, गुज़श्ता चंद हफ़्तों से ग़िज़ाई अशीया की क़ीमतें कम हुई हैं।

इफ़रात-ए-ज़र पर मुबाहिस का जवाब देते हुए परनब मुकर्जी ने क़ीमतों में इज़ाफे़ को आलमी सूरत-ए-हाल से मरबूत किया अलबत्ता ये वाज़िह कर दिया कि हुकूमत क़ीमतियों की सूरत-ए-हाल पर क़ाबू पाने के लिए सब्सीडी में इज़ाफ़ा करने के मौक़िफ़ में नहीं है।

उन्होंने इस्तिदलाल पेश किया कि यू पी ए हुकूमत के दौरान मआशी पैदावार में ज़बरदस्त इज़ाफ़ा हुआ। ताहम उन्हों ने ये भी एतराफ़ किया कि अंदरून-ए-मुल्क मजमूई पैदावार की शरह 7 फ़ीसद रिकार्ड की गई है जो ग़ैर मुनासिब है।

उन्होंने अपोज़ीशन की इस दलील को क़बूल करने से इनकार किया कि ये मआशी पैदावारी की शरह अपने वक़्त की सब से कमतरीन शरह है। उन्हों ने मज़ीद कहा कि इफ़रात-ए-ज़र और पैदावार के दरमयान कोई राबिता नहीं है।

हमें इफ़रात-ए-ज़र पर क़ाबू पाना होगा और हमें पैदावार की शरह में इज़ाफ़ा करना होगा। बराए करम ये मत काए कि कुछ नहीं हो रहा है। इन डी ए और बाएं बाज़ू पार्टीयों ने उन के जवाब पर अदम इतमीनान का इज़हार किया और ऐवान से वाक आउट करदिया। सुषमा स्वराज ने कहा कि परनब मुकर्जी ने जो जवाब दिया है वो एक से ज़ाइद मर्तबा बता चुके हैं।

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