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ग़ुर्बत और तालीमी पसमांदगी मुसलमानों की तरक़्क़ी में अहम रुकावट:रिपोर्ट

हैदराबाद 14 मई:मुसलमानों की तालीमी और मआशी पसमांदगी का जायज़ा लेने वाले सुधीर कमीशन आफ़ इन्क्वारी ने ज़िला कलेक्टर रंगारेड्डी और मुख़्तलिफ़ मह्कमाजात के ओहदेदारों के साथ अक़लियती बहबूद की स्कीमात पर अमल आवरी का जायज़ा लिया।

रंगारेड्डी कलक्ट्रेट में मुनाक़िदा इस मीटिंग में कमीशन के सदर नशीन जी सुधीर के अलावा अरकान आमिर उल्लाह ख़ान और एम-ए बारी शरीक थे। कलेक्टर हैदराबाद रग्घू नंद राव‌ ने ज़िला से ताल्लुक़ रखने वाले तमाम आला ओहदेदारों और मुख़्तलिफ़ मह्कमाजात के इंचार्ज ओहदेदारों को मीटिंग में तलब किया था। तमाम मह्कमाजात ने अपनी स्कीमात की रिपोर्ट पेश की और बताया कि स्कीमात में अक़लियतों की हिस्सादारी इतमीनान बख़श है।

कमीशन का एहसास है कि अक़लियती बहबूद की स्कीमात की हद तक कारकर्दगी बेहतर है दुसरे स्कीमात में अक़लियतों की हिस्सादारी सिफ़र के बराबर है। इस की एक अहम वजह स्कीमात से ना वाक़फ़ीयत है। कमीशन के ज़राए ने बताया कि बैंकों से क़र्ज़, छोटे कारोबार के आग़ाज़ और इसी तरह की दुसरी स्कीमात के मुआमले में अक़लियतें दूसरे तबक़ात के मुक़ाबले काफ़ी पसमांदा हैं। तालीमी पसमांदगी और शऊर की कमी के नतीजे में वो स्कीमात के फ़वाइद हासिल करने से महरूम हैं।

कमीशन के इस्तिफ़सारात पर ओहदेदारों ने एतराफ़ किया कि मुस्लिम अक़लियत से ताल्लुक़ रखने वाले लोग बमुश्किल उन से रुजू होते हैं। वो स्कीमात से वाक़िफ़ नहीं और कोई रज़ाकाराना तंज़ीम या मुसलमानों के नुमाइंदे उनहीं वाक़िफ़ कराने की ज़हमत नहीं करते।

कमीशन ने ओहदेदारों को हिदायत दी कि वो अपनी स्कीमात के बारे में अक़लियतों में शऊर बेदारी की मुहिम शुरू करें और इस सिलसिले में रज़ाकाराना तन्ज़ीमों की ख़िदमात हासिल की जाएं।

अक़लियतों से मुताल्लिक़ स्कीमात जैसे शादी मुबारक, ओवरसीज़ स्कालरशिप, अक़लियती फाइनैंस कारपोरेशन की क़र्ज़ स्कीम और स्कालरशिप जैसी स्कीमात के नताइज से कमीशन को वाक़िफ़ किराया गया। ओहदेदारों ने इस बात का एतराफ़ किया कि मुसलमानों में ग़ुर्बत और तालीमी पसमांदगी उन की तरक़्क़ी में अहम रुकावट है।

कमीशन के सदर नशीन और अरकान ने अक़लियती स्कीमात पर इतमीनान का इज़हार करते हुए बैंकों से मरबूत स्कीमात में अक़लियतों को शामिल करने की तजवीज़ पेश की। उन्होंने स्कीमात पर अमल आवरी में शफ़्फ़ाफ़ियत का मश्वरह दिया। कमीशन का कहना है कि मुस्लिम अक़लियत के ज़िम्मेदार शख़्सियतों को चाहीए कि वो ग़रीब अक़लियतों की रहनुमाई करें।

बैंक ओहदेदारों ने बताया कि अगर कोई बैंक के लिए रुजू होता है तो उस के पास कोई मन्सूबा नहीं होता जिसके सबब बैंक क़र्ज़ की मंज़ूरी से क़ासिर है। अक़लियती बहबूद के ओहदेदारों ने स्टाफ़ की कमी की शिकायत की जिस पर कमीशन ने हुकूमत की तवज्जा मबज़ूल करने का यकीन दिया है।

कमीशन की तरफ से अपने तौर पर शुरू करदा सर्वे का काम 50 फ़ीसद मुकम्मिल हो गया। कमीशन ने सर्वे की पेशरफ़त का जायज़ा लिया जिसमें ये नतीजा सामने आया है कि हर शोबे में मुस्लमान नजरअंदाज़ किए गए हैं। सरकारी मुलाज़िमतों में इन की नुमाइंदगी बमुश्किल एक फ़ीसद है। सुधीर कमीशन आने वाले दिनों में दुसरे अज़ला में इस तरह के मीटिंग मुनाक़िद करेगा

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