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ग़ैर आबाद मसाजिद को आबाद करने वक़्फ़ बोर्ड की अपील

नुमाइंदा ख़ुसूसी-शहर हैदराबाद की ग़ैर आबाद मसाजिद की तसावीर और वक़्फ़ बोर्ड के रिकार्ड के साथ रोज़नामा सियासत में 15 सितंबर से जो सिलसिला इशाअत का शुरू हुआ है वो अल्हम्दुलिल्ला जारी है । ग़ैर आबाद मसाजिद में कुछ मसाजिद ऐसी हैं जिन प

नुमाइंदा ख़ुसूसी-शहर हैदराबाद की ग़ैर आबाद मसाजिद की तसावीर और वक़्फ़ बोर्ड के रिकार्ड के साथ रोज़नामा सियासत में 15 सितंबर से जो सिलसिला इशाअत का शुरू हुआ है वो अल्हम्दुलिल्ला जारी है । ग़ैर आबाद मसाजिद में कुछ मसाजिद ऐसी हैं जिन पर मुस्लमान ही क़ाबिज़ हैं । अख़बार सियासत ने अभी तक अपनी ख़िदमात के ज़रीया मिल्लत-ए-इस्लामीया के दिल-ओ-दिमाग़ और फ़िक्र के लिए चंद हक़ायक़ सामने लाए हैं । बाअज़ वीरान मसाजिद आसारे-ए-क़दीमा के तेहत हैं तो ज़्यादा तर वक़्फ़ बोर्ड के तेहत हैं ।

अख़बार सियासत ने सिदक़ दिल से महिज़ अल्लाह की रज़ा जोई के लिए इस मसला को उठाया है ताकि हमारी हमीयत बेदार हो और हम अल्लाह के घरों की हिफ़ाज़त मूसिर अंदाज़ में करसकें जो हमारा दीनी और दुनियावी फ़र्ज़ है । हम ने सिर्फ जज़बा ख़िदमत से मसाजिद के ग़ैर आबाद होने के मसला पर क़ारईन किराम की तवज्जा मबज़ूल कराने की कोशिश की है जिस का मक़सद किसी जमात , फ़र्द या गिरोह को तन्क़ीद का निशाना बनाना नहीं है बल्कि कोशिश यही है कि उम्मत मुस्लिमा अपने अतराफ़-ओ-अकनाफ़ में फैली हुई हमावक़त गशत करती हुई ख़राबियों से बाख़बर रहें और नमाज़ की पाबंदी के साथ ग़ैर आबाद मसाजिद को फिर से आबाद करने की उम्मत को फ़िक्र लाहक़ हो अभी तक तक़रीबन 60 ऐसी मसाजिद से अवाम को वाक़िफ़ किराया गया जिस से मुसलमानान हैदराबाद में बेचैनी की लहर पैदा होगई है ।

दफ़्तर सियासत को टैली फोन्स काल आरहे हैं ई मेल वसूल होरहे हैं जिन के ज़रीया अवाम अपने ख़्यालात और जज़बात का इज़हार कररहे हैं जिस से साफ़ ज़ाहिर होता है और अंदाज़ा होता है कि मुस्लमानों में ईमान की हरारत किस क़दर मौजूद है वो इन मसाजिद को आबाद करने के लिए किस क़दर बेचैन हैं । इसी ज़िमन में हम ने वक़्फ़ बोर्ड के जवाँसाल सदर नशीन मौलाना ग़ुलाम अफ़ज़ल ब्याबानी ख़ुसरो पाशाह से बातचीत की और हमारे पास मौजूद इन तमाम ग़ैर आबाद मसाजिद की दिलसोज़ तसावीर भी उन्हें য৒ब दिखाएंगे जो हमारे पास मौजूद हैं । उन्हों ने भी एक एक मस्जिद को ग़ौर से देखा फिर अपने सैक्रेटरी से कहा कि अख़बार सियासत में जो ग़ैर आबाद मसाजिद की तसावीर छप रही हैं इस की फाईल ले आव । फिर उन्हों ने कहा कि मैंने पहले ही दिन से एक टीम इस काम पर लगादी है जिस का काम ही ये है कि मस्जिद का मुआइना कर के दूसरे ही दिन मुकम्मल रिपोर्ट पेश करे । हम को उन्हों ने ये फाईल बताई उन्हों ने कहा कि ख़ुद उन्हें भी हर रोज़ फ़ोन कालिस वसूल होरहे हैं दीनी मदारिस से ताल्लुक़ रखने वालों के इलावा जज़बा ईमानी से सरशार मुस्लिम नौजवान भी इन से राबिता पैदा कररहे हैं और कह रहे हैं कि इन मसाजिद को हम आबाद करना चाहते हैं । ख़ुसरो पाशाह ने कहा कि सब से पहले ग़ैर आबाद मसाजिद को अलग करने की ज़रूरत है कितनी मसाजिद आरक्योलोजी के तेहत हैं और कितनी वक़्फ़ बोर्ड की मिल्कियत हैं इन में से कितनी मसाजिद ग़ैर मुस्लिम आबादी वाले इलाक़ों में हैं और कितनी ग़ैर आबाद मसाजिद ऐसी हैं जो मुस्लिम महलों में हैं । इस तरह की ज़मुरा बंदी का काम शुरू भी होचुका है ।

वो चाहते हैं कि सब से पहले मुस्लिम महलों की ग़ैर आबाद मसाजिद का जायज़ा लिया जाय ।इन की एक फ़हरिस्त तैय्यार की जाय इस के बाद क़रीब रहने वालों की एक कमेटी बनाकर उन के हवाला मस्जिद करदी जाय । उन्हों ने ये तजवीज़ भी रखी कि वो दीनी मदारिस जो किराया की इमारतों में चलाए जा रहे हैं इन को ये ग़ैर आबाद मस्जिदें हवाला करदी जाएं । इस तजवीज़ पर अभी ग़ौर होरहा है ताकि मसाजिद आबाद हैं और उन के तेहत जो वक़्फ़ अराज़ी हैं इन का भी तहफ़्फ़ुज़ होसके । इस सिलसिला में बहुत जल्द फ़ैसला किया जाएगा । दिलचस्पी रखने वाले हज़रात रुजू होसकते हैं । सदर वक़्फ़ बोर्ड से बातचीत के दौरान एहसास हुआ कि वक़्फ़ बोर्ड में सियासत की तहरीरों से बेचैनी ज़रूर पैदा हुई है । इन वीरान मसाजिद की भी कई इक़साम हैं । जिन का अख़बार सियासत ने तफ़सीली तज़किरा करदिया है ।मसला ये कि बाअज़ वीरान मसाजिद ऐसी हैं जो मुकम्मल तौर पर ग़ैर मुस्लिम आबादी वाले इलाक़ों में हैं और जिन मसाजिद को कचरा दानों में तबदील करदिया गया है ।

सदर वक़्फ़ बोर्ड ने कहा कि इस ज़मुरा में शामिल तमाम मसाजिद की दाग़ दोज़ी की जाएगी और उन की हिसारबंदी कर के मस्जिद की असल इमारत को जालियों के ज़रीया महफ़ूज़ करदिया जाएगा । सदर वक़्फ़ बोर्ड ने कहा कि वो मुस्लमान हज़रात जो साहिब इस्तिताअत हैं सवाब जारीया की नीयत और जज़बा से उन मसाजिद की दाग़ दोज़ी , मुरम्मत और दरूस्तगी का काम कर के उन्हें आबाद करना चाहते हैं वो इस कार-ए-ख़ैर के सिलसिला में वक़्फ़ बोर्ड से रुजू होसकते हैं । वक़्फ़ बोर्ड अपनी निगरानी में काम कराएगा और क़रीबी इलाक़ा के मुस्लमानों को मस्जिद की निगरानी की ज़िम्मेदारी देगा । उन्हों ने कहा कि मुझे भी रुहानी ख़ुशी होगी कि मैंने उन वीरान मसाजिद को फिर से आबाद करने का दीनी फ़रीज़ा अंजाम दिया ।

अल्लाह के घर इतनी कसीर तादाद में ग़ैर आबाद हैं तो ये हम मुस्लमानों की इजतिमाई ज़िम्मेदारी है कि उन्हें आबाद करें । इन मसाजिद की मीनारों से अज़ान की आवाज़ फिर से बरसों के बाद गूंजे , मसाजिद के सहन और दामन में हमारे सजदों के निशान फिर से उभरें । वक़्फ़ बोर्ड इस मुआमला में अहले ख़ैर हज़रात से हर मुम्किन तआवुन करेगा ।।

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