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ग़ैर सऊदी अफ़राद को इनामात के तौर पर जायदाद की मिल्कीयत का हक़ नहीं

सऊदी वज़ारत-ए-दाख़िला ने सुबाई गवर्नर टेस को हिदायत की है कि इनामात की तक़सीम के दौरान इस बात को यक़ीनी बनाया जाए कि इससे जायदाद की मिल्कीयत के क़वानीन से मुताल्लिक़ मुल्क के ज़ाबतों की ख़िलाफ़वर्ज़ी होने ना पाए ।

सऊदी वज़ारत-ए-दाख़िला ने सुबाई गवर्नर टेस को हिदायत की है कि इनामात की तक़सीम के दौरान इस बात को यक़ीनी बनाया जाए कि इससे जायदाद की मिल्कीयत के क़वानीन से मुताल्लिक़ मुल्क के ज़ाबतों की ख़िलाफ़वर्ज़ी होने ना पाए ।

रोज़नामा अल वतन के मुताबिक़ हालिया अर्सा के दौरान तिजारती मीलों में इनामात के ऐलानात में भारी इज़ाफ़ा हुआ है और बाअज़ इदारों की जानिब से रिहायशी फ्लैट्स के इनामात की पेशकश भी की गई है । चूँकि इनामी मुक़ाबलों में कोई भी हिस्सा ले सकते हैं जिससे ये एहतिमाल भी हो सकता है कि किसी बैरूनी तारिक वतन को ये इनाम उठ जाए लेकिन मुल्की क़वानीन के तहत किसी भी बैरूनी शहरी को सरज़मीन सऊदी अरब में इनाम के ज़रीया जायदाद की मिलकीयत हासिल करने का अहतयार नहीं है । 2000 में मजलिस वुज़रा की तरफ़ से जारी कर्दा अहकाम के मुताबिक़ ग़ैर सऊदी अफ़राद को वज़ारत-ए-दाख़िला से हुसूल इजाज़त के बाद सिर्फ अपने निजी इस्तेमाल के लिए जायदाद खरीदने का मौक़ा दिया गया था ।

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