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ज़रदारी मुंबई हमला मुल्ज़मीन को हवाले करने तैय्यार थे

वाशिंगटन 19 नवंबर ( पी टी आई ) सदर-ए-पाकिस्तान आसिफ़ अली ज़रदारी उसामा बिन लादन की मौत के बाद इमकानी फ़ौजी बग़ावत से इस क़दर ख़ौफ़ज़दा थे कि वो एक नई सीकीवरीटी टीम तशकील देने को तैय्यार थे जो अमरीकीयों केलिए काबिल-ए-क़बूल हो इस के इलावा उन्हों

वाशिंगटन 19 नवंबर ( पी टी आई ) सदर-ए-पाकिस्तान आसिफ़ अली ज़रदारी उसामा बिन लादन की मौत के बाद इमकानी फ़ौजी बग़ावत से इस क़दर ख़ौफ़ज़दा थे कि वो एक नई सीकीवरीटी टीम तशकील देने को तैय्यार थे जो अमरीकीयों केलिए काबिल-ए-क़बूल हो इस के इलावा उन्हों ने अमरीका से वाअदा किया था कि मुंबई हमलों के मुल्ज़िमीन को हिंदूस्तान के हवाले करदेंगे । इन मुल्ज़िमीन में आई ऐस आई अमला के भी अरकान थे ।

ये वाअदे उस वक़्त के सदर नशीन जवाइंट चीफ़स आफ़ स्टाफ़ एडमीरल माईक मोलिन को भेजे गए एक खु़फ़ीया मेमो में किए गए थे । मिस्टर ज़रदारी का ये मेमो एक पाकिस्तानी । अमरीकी ताजिर मंसूर एजाज़ ने माह मई में मिस्टर माईक मोलिन के हवाले किया था । इस खु़फ़ीया मेमो के ताल्लुक़ से इत्तिलाआत सब से पहले ख़ुद मंसूर एजाज़ ने फ़ैनानशीयल टाईम्स में तहरीर करदा अपने मज़मून में ज़ाहिर की थीं। मेमो के मुताबिक़ मुल्क में सीवीलीयन हुकूमत की क़ियादत करने वाले मिस्टर ज़रदारी चाहते थे कि एक नया सीकीवरीटी ढांचा तशकील दिया जाय ।

मिस्टर एजाज़ ने इद्दिआ किया कि ये मेमो अमरीका में पाकिस्तानी सफ़ीर हुसैन हक़्क़ानी ने तैय्यार किया था ताहम उन्हों ने इन इल्ज़ामात की तरदीद की है और अपना इस्तीफ़ा मिस्टर ज़रदारी के हवाले करदिया है । माईक मोलिन के तर्जुमान की ख़िदमात अंजाम देने वाले कैप्टन जान कर्बी ने कल सहाफ़ीयों को बताया कि इस मेमो के मवाद और इस की मौजूदगी के सबूत से किसी भी तरह मिस्टर मोलिन की कारकर्दगी मुतास्सिर नहीं होती ।

उन्हों ने जनरल क्यानी और पाकिस्तानी हुकूमत के साथ बेहतरीन ताल्लुक़ात रखे थे । मिस्टर मोलिन ने इस मेमो को कोई एहमीयत नहीं दी और इस पर सी के साथ भी कोई तबादला-ए-ख़्याल नहीं किया । इस मेमो के मतन और इस की एक नक़ल को ख़ारिजा पलीसी के ब्लॉग केबल पर पेश करदिया गया । इस मेमो में कहा गया कि दरख़ास्त की जाती है कि आप रास्त मुदाख़िलत करते हुए जनरल क्यानी को एक फ़ौरी और सख़्त-ओ-रास्त पयाम देते हुए मुतालिबा किया जाय कि ख़ुद वो और जनरल शुजाअ पाशाह ( आई ऐस आई सरबराह ) सीवीलीयन हुकूमत को माज़ूल करने अपनी कोशिशों से बाज़ आजाऐं ।

तारीख़ में 1971 के लमहात का इआदा हो रहा है । मेमो में कहा गया है कि अगर अमरीका ऐसा करने तैय्यार होजाए तो इस की सयासी और फ़ौजी मदद के ज़रीया सीवीलीयन हुकूमत में भी तबदीलीयां की जाएंगी और बहैसीयत मजमूई क़ौमी सलामती मुशीर और दूसरे क़ौमी सलामती ओहदेदारों को बाएतिमाद मुशीरों के ज़रीया तबदील करदिया जाएगा जिन में साबिक़ा फ़ौजी और सीवलीयन क़ाइदीन को शामिल किया जाएगा जिन्हें अमरीका पसंद करता है ।

उन अफ़राद के नाम शख़्सी तौर पर मेमो पहूँचाने वाले शख़्स की जानिब से बता दिए जाएंगे।इस मेमो की वजह से पाकिस्तान में तेज़ी से तबदीलीयां रौनुमा हो रही हैं और अमरीकी सफ़ीर मुतय्यना अमरीका ने इस्तीफ़ा भी पेश करदिया है ।

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