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ज़लज़ले के झटके से हिला हिमाचल प्रदेश

धर्मशाला, 14 जुलाई: हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले समेत कई हिस्सों में हफ्ते की देर रात ज़लज़ले का एक तगड़ा झटका महसूस किया गया। रिक्टर पैमाने इसकी शिद्दत 4.5 थी।

धर्मशाला, 14 जुलाई: हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले समेत कई हिस्सों में हफ्ते की देर रात ज़लज़ले का एक तगड़ा झटका महसूस किया गया। रिक्टर पैमाने इसकी शिद्दत 4.5 थी।

इसका मर्क्ज़ कांगड़ा बताया जा रहा है। कांगड़ा जिले खासकर कांगड़ा, धर्मशाला, योल और मैकलोडगंज जैसे ज़्यादा सेन्सिटिव जोन फाइव में शामिल हैं। हफ्ते की रात ठीक 11:20 पर आए ज़लज़ले के तेज झटके से मकान हिल उठे और लोग दहशत के मारे घरों से बाहर निकल आए।

झटके इतने तेज थे कि घरों में चल रहे सिलिंग फैन और दूसरे सामान काफी देर तक हिलते रहे। वहीं, लोगों की रसोई में रखी क्रॉकरी व अन्य सामान झनझना उठे।

हालांकि देर रात खबर लिखे जाने तक किसी तरह के जानमाल के नुकसान की इत्तेला नहीं है।

रात के वक्त लोगों में इस झटके की दहशत साफ देखी गई। इससे पहले कांगड़ा में 1905 में 8.7 की शिद्दत से आए ज़लज़ले के झटके में बीस हजार लोगों की जान चली गई थी। जो अब तक की तारीख में सबसे बड़ा तबाहकुन ज़लज़ला था।

माहिरीन का मानना है कि अगर इसी झटके की शिद्दत रिक्टर पर पांच डिग्री से ज्यादा होती तो कांगड़ा में काफी नुकसान हो सकता था। देहरादून वाकेए वाडिया इंस्टीट्यूट ऑफ हिमालयन जियोलॉजी के सीनीयर सा‍इंटिस्ट डॉ. सुशील कुमार का कहना है कि ज़लज़ला की शिद्दत 4.5 थी जिसका मरकज़ कांगड़ा ही रहा।

उन्होंने कहा कि रिहायशी इलाकों में 5 डिग्री से ऊपर के ज़लज़ले तबाह्कुन हैं। खासकर हिमाचल के पहाड़ी इलाकों में हो रही तामीर ज़लज़ले के बड़े झटकों को सहने की हालत में नहीं है।

इधर, देर रात घरों से बाहर निकले धर्मशाला के साकिन मोहित, ट्विंकल, राघवी और कनव ने बताया कि वे काफी देर तक बाहर रहे।

उधर जम्मू-कश्मीर के कई हिस्सों में भी ज़लज़ले भूकंप के झटके महसूस किए गए। जम्मू-कश्मीर में तड़के और दोपहर में झटके आए। इसमें किसी तरह के नुकसान की कोई खबर नहीं है।

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