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ज़ाकिर नाइक के एनजीओ की जांच में वित्तीय सलाहकार की मदद लेगी एनआईए

राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) जाकिर नाईक के एनजीओ के मामले को हल करने के लिए वित्तीय सलाहकार  की मदद लेने के लिए गृह मंत्रालय (एमएचए) की मंजूरी लेगी।

इस कदम नाइक के एनजीओ इस्लामिक रिसर्च फाउंडेशन (आईआरएफ) में मारे गए एनआईए के छापे के बाद लिया गया है।

आपरेशन के दौरान, वीडियो टेप और नाइक के सार्वजनिक भाषणों की डीवीडी, संपत्ति और निवेश, वित्तीय लेनदेन, निषिद्ध आईआरएफ के विदेशी और घरेलू वित्त पोषण के साथ ही इसकी संबद्ध कंपनियों, और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों से संबंधित दस्तावेज बरामद किए जा चुके हैं।

हालांकि, एजेंसी के पास एक सीमित टीम है, इसलिये दस्तावेजों को समझने के लिए वित्तीय विशेषज्ञों की जरूरत है।

एक शीर्ष स्तर के एनआईए के स्रोत ने मेल टुडे को बताया कि “एक वित्तीय सलाहकार की भर्ती की लागत 35 लाख रुपये आंकी गई है।”

सूत्रों ने बताया कि हालांकि एजेंसी ने जांच और सबूत को तेज़ी से इकठ्ठा किया था, लेकिन वित्तीय मामलों की वजह से जांच में रुकावट आ गयी है।

हालाँकि सूत्र ने वित्त मंत्रालय के अधिकारीयों से सहायता की संभावना से इनकार करते हुए कहा कि एजेंसी को पूर्णकालिक मदद और जल्दी परिणाम की जरूरत है।

सूत्रों का कहना है कि एनआईए केपीएमजी जैसी एक वित्तीय फर्म को काम पर रखने पर विचार कर रही है। लेकिन वह पहले मंजूरी के लिए गृह मंत्रालय से संपर्क करेगी।

गुरुवार को सरकार ने दिल्ली उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति संगीता ढींगरा सहगल के साथ एक ट्रिब्यूनल का गठन किया है जो निर्णय लेगा कि आईआरएफ को गैर कानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम, 1967 के तहत एक “अवैध एसोसिएशन” के रूप में घोषित करने के लिए पर्याप्त कारण थे या नहीं।

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