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फ़सीह के मुक़द्दमे की तेज़ रफ़्तार समाअत की दरख़ास्त

सऊदी अरब में पाँच महिने तक हिरासत में रखने के बाद हिंदूस्तान के हवाले किए जाने वाले इंडियन मुजाहिदीन के मुबय्यना मुश्तबा दहश्तगर्द फ़सीह मुहम्मद के ख़ानदान ने उन के मुक़द्दमे की सरीअत अंगेज़ समाअत केलिए सुप्रीम कोर्ट से रुजू होने क

सऊदी अरब में पाँच महिने तक हिरासत में रखने के बाद हिंदूस्तान के हवाले किए जाने वाले इंडियन मुजाहिदीन के मुबय्यना मुश्तबा दहश्तगर्द फ़सीह मुहम्मद के ख़ानदान ने उन के मुक़द्दमे की सरीअत अंगेज़ समाअत केलिए सुप्रीम कोर्ट से रुजू होने का फ़ैसला किया है ।

फ़सीह के वालिद(पिता) फैरोज़ अहमद ने पी टी आई से कहा कि सुप्रीम कोर्ट से हम इस मुक़द्दमे की सरीअत अंगेज़ समाअत की दरख़ास्त करेंगे ता कि वो जल्द से जल्द ख़ुद को बेक़सूर साबित करसके ।

मिस्टर फैरोज़ अहमद ने कहा कि मेरे वालिद (महमूद बाबू ) क्योकि पंचायत के 22 साल तक सदर रहे हैं और पाक दामन और साफ़ सुथरी साख के सबब अवाम(जनता) के तमाम तबक़ात एहतिराम करते हैं ।

मेरे ख़ानदान का कोई मुजरिमाना रिकार्ड नहीं है ।उन्हों ने मज़ीद कहा कि हमें सुप्रीम कोर्ट पर भरपूर भरोसा है और वो ही मेरे बेटे से इंसाफ़ करेगा । फ़सीह की बीवी निकहत पर‌वीण और वालिदा आमिरा ज़ुल दिल्ली रवाना होचुकी हैं ।

फैरोज़ अहमद बैन पट्टी के एक सरकारी इबतिदाई तिब्बी मर्कज़ में मैडीकल ऑफीसर हैं । फ़सीह की वालिदा एक उर्दू मीडियम स्कूल की हैड मिस्ट्रेस हैं । फ़सीह की बीवी निकहत इस साल मई के दौरान अदालत से रुजू होकर दावे कि थीं कि इन के शौहर मर्कज़ी सैक्योरीटी एजैंसीज़ की तहवील में हैं ।

इस इल्ज़ाम की हुकूमत ने तरदीद की थी । बैंगलौर के चिन्नास्वामी स्टेडीयम में धमाका और जामा मस्जिद (दिल्ली ) के क़रीब शूटिंग के वाक़ियात में फ़सीह को मुबय्यना तौर पर मुलव्वस(शामिल‌) बताया गया है ।ये दिनों वाक़ियात 2010 में पेश आए ।

वो दिल्ली और कर्नाटक पुलिस को मतलूब है । फ़सीह के ख़ानदान का ताल्लुक़ दरभंगा से 35 किलो मीटर दूर मौज़ा बराह समाईला से है । फ़सीह ने दरभंगा के मिल्लत कॉलेज से एंटर मीडीय‌ट और भटकल कर्नाटक के अंजुमन इंजीनीयरिंग कॉलेज से इंजीनीयरिंग किया था ।

पाँच साल पहले वो सऊदी अरब रवाना हुए जहां उन के भाई भी मुलाज़मत केलिए मुक़ीम हैं । वो एक सऊदी कंपनी में बहैसीयत इनजीनिय‌र मुलाज़िम थे । वाज़िह रहे कि फ़सीह मुहम्मद को सऊदी अरब में लिए जाने और पाँच माहिने तक तहवील में रखने के बाद हिंदूस्तान भेज दीया जाने की इत्तिलाआत के बिहार और कर्नाटक में उन के रिश्तेदारों जानने वालों में हैरत-ओ-ताज्जुब की लहर दौड़ गई ।

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