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फ़िर्कावराना फ़सादाद होते नहीं करवाए जाते हैं: प्रोफ़ैसर इमतियाज़ अहमद

नई दिल्ली ०१ नवम्बर (यू एन आई) किसी भी निज़ाम में इस्लाह या इस का ख़ातमा सिर्फ अवामी तहरीक के ज़रीया ही मुम्किन है इस के इलावा और कोई मुतबादिल नहीं है।

नई दिल्ली ०१ नवम्बर (यू एन आई) किसी भी निज़ाम में इस्लाह या इस का ख़ातमा सिर्फ अवामी तहरीक के ज़रीया ही मुम्किन है इस के इलावा और कोई मुतबादिल नहीं है।

इन ख़्यालात का इज़हार प्रोफ़ैसर इमतियाज़ अहमद ने गुज़श्ता रात भरत पर के गोपाल गढ़ में होने वाले फ़िर्कावाराना फ़साद पर मबनी रिपोर्ट और दस्तावेज़ी फ़िल्म और फ़ेक्ट फ़ाइंडिंग रिपोर्ट के इजरा की तक़रीब से ख़िताब करते हुए किया।

प्रोफॆसर इमतियाज़ अहमद ने कहा कि जमहूरीयत में तबदीली का तरीक़ा अवामी तहरीक ही है इस के ज़रीया ही हम किसी निज़ाम या रियासत को मजबूर करसकते हैं कि वो अवाम के हक़ में अपनी पालिसी वज़ा करॆ ।

उन्होंने कहा कि फ़िर्कावाराना फ़सादाद होते नहीं हैं किराए जाते हैं। जिस तरह आई ऐम एफ़ के इशारे पर हुकूमत अपनी पालिसीयां तबदील करते हुए सबसिडी और दीगर फ़लाही मंसबूबों को तर्क करदेती है इसी तरह कॉरपोरेट सैक्टर के इशारे भी तशद्दुद बरपा किया जाता है क्यों कि इन तमाम वाक़ियात का सिरा मआशियात से जुड़ा हुआ है।

उन्होंने कहा कि आज बेशतर तशद्दुद और फ़सादाद ज़मीन-ओ-जायदाद (क़ब्रिस्तान ईदगाह वग़ैरा) की वजह से ही होते हैं और ये हमें नहीं भूलना चाहीए कि सरमाया दाराना निज़ाम में जायदाद की बहुत एहमीयत है।

हर सरमायादार आज सब से बड़ा लैंड लार्ड है। जहां भी मौक़ा मिलता है वो पूरी ज़मीन ख़रीद लेता है।

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