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फ़ौज की पेश क़दमी की रिपोर्ट ग़लत और बे बुनियाद

वज़ीर-ए-आज़म मनमोहन सिंह और वज़ीर-ए-दिफ़ा ए के अनटोनी ने वस्त जनवरी के दौरान दिल्ली की सिम्त फ़ौज की बर ख़िलाफ़ मामूल पेशक़दमी की अख़बारी इत्तेलात को बिलकुल्लिया तौर पर बेबुनियाद और सनसनी ख़ेज़ी पर मबनी क़रार देते हुए यकसर मुस्तर्द कर दिया।

वज़ीर-ए-आज़म मनमोहन सिंह और वज़ीर-ए-दिफ़ा ए के अनटोनी ने वस्त जनवरी के दौरान दिल्ली की सिम्त फ़ौज की बर ख़िलाफ़ मामूल पेशक़दमी की अख़बारी इत्तेलात को बिलकुल्लिया तौर पर बेबुनियाद और सनसनी ख़ेज़ी पर मबनी क़रार देते हुए यकसर मुस्तर्द कर दिया। वज़ीर-ए-आज़म मनमोहन सिंह ने राष्ट्रपति भवन में मुनाक़िदा एक तक़रीब में शिरकत के मौक़ा पर अख़बारी नुमाइंदों से बातचीत के दौरान कहा कि ये ख़बरें सनसनीखेज़ ख़बर रसानी पर मबनी हैं और ऐसी ख़बरों को उन की ज़ाहिरी हालत पर कुबूल नहीं किया जाना चाहीए।

हुकूमत और आर्मी चीफ़ के दरमयान तात्तुल और इख़तेलाफ़ से मुताल्लिक़ एक सवाल पर डाक्टर मनमोहन सिंह ने जवाब दिया कि आर्मी चीफ़ का मंसब एक जलील-उल-क़दर ओहदा है हम तमाम की ज़िम्मेदारी है कि कोई ऐसी हरकत ना की जाए जिससे इस ओहदा का वक़ार मुतास्सिर हो सकता है। वज़ीर-ए-आज़म मनमोहन सिंह इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट पर रद्द-ए-अमल का इज़हार कर रहे थे जिसमें कहा गया था कि 16 और 17 जनवरी की दरमयानी शब हिसार (हरियाणा) में तैनात एक पियादा फ़ौज का मुकम्मल यूनिट अपनी लड़ाका गाड़ीयों के साथ दिल्ली की सिम्त पेशक़दमी का आग़ाज़ कर दिया था।

ये वही दिन था जब आर्मी चीफ़ जनरल वी के सिंह अपनी उम्र के मसला पर सुप्रीम कोर्ट से रुजू हुए थे। आगरा में तैनात 50 वीं नियम फ़ौजी दस्ता का एक काबिल हिस्सा भी पालम की सिम्त बढ़ रहा था। इस अख़बारी रिपोर्ट से इम्कानी फ़ौजी बग़ावत तास्सुर देने की कोशिश की गई थी। वज़ीर-ए-दिफ़ा ए के अनटोनी ने मुसल्लह अफ़्वाज की जानिब से बग़ावत के अंदेशों को बिलकुल्लिया तौर पर पर बेबुनियाद क़रार देते हुए मुस्तर्द कर दिया और इस एतेमाद का इज़हार किया कि वो ऐसी कोई हरकत नहीं कर सकते जिससे जमहूरीयत पामाल हो सकती है।

मिस्टर अनटोनी ने विशाखापटनम में न्यूक्लियर तवानाई पर मबनी आबदोज़ आई एन एस चकरा का इफ़्तेताह करने के बाद प्रेस कान्फ्रेंस से ख़िताब करते हुए कहा कि ऐसी ख़बरें क़तई बेबुनियाद हैं। फ़ौज पहले ही उस की वज़ाहत कर चुकी है। ये (पेशक़दमी) फ़ौज की हसब-ए-मामूल सरगर्मीयों में शामिल है। इसमें कोई ग़ैरमामूली या बरख़िलाफ़ मामूल बात नहीं है।

मुसल्लह अफ़्वाज की हुब्बुल वतनी ( देश प्रेमी) पर हमें पूरा भरोसा है। इन (फ़ौज) की हुब्बुल वतनी पर कोई शक मत कीजिए। वो कोई ऐसी हरकत नहीं करेंगे, जिससे हिंदूस्तानी जमहूरीयत की बैग कन्नी होने का अहतमा होगा। मिस्टर अनटोनी भी इंडियन एक्सप्रेस में शाय शूदा रिपोर्ट से मुताल्लिक़ सवालात का जवाब दे रहे थे।

एक सवाल कनुंदा ने इन से कहा कि इस रिपोर्ट ने फ़ौजी बग़ावत के अंदेशों के बारे में कई खतरों का इशारा दिया था और क्या हुकूमत भी ऐसे किसी अंदेशा से ख़ौफ़ज़दा हो गई थी और इस सूरत-ए-हाल से निमटने के लिए इस (हुकूमत) ने किया किया था। क्या वो फ़ौजी बग़ावत के अंदेशा को मुस्तर्द करते हैं। मिस्टर अनटोनी ने कहा कि मुसल्लह अफ़्वाज सच्चे मुहिब-ए-वतन हैं और आप इन सिपाहीयों की हुब्बुल-वतनी पर कोई शक मत कीजिए जो मुल़्क की सरहदों पर अपनी जानें निछावर कर रहे हैं। वज़ीर-ए-दिफ़ा ने कहा कि मुझे हिंदूस्तानी फ़ौज, बहरीया और फ़िज़ाईया और कोस्ट गार्डस पर फ़ख़र है।

उन्होंने मीडीया पर ज़ोर दिया कि वो क़ौमी सलामती के मसाइल पर मुसल्लह अफ़्वाज के वक़ार को ना घटाऐं। वज़ारत-ए-दिफ़ा के एक तर्जुमान सीता नशो कार ने कहा कि रिपोर्ट में उठाए गए सवालात पर फ़ौज की जानिब से पहले ही वज़ाहत की जा चुकी है। फ़ौज वक़फ़ा वक़फ़ा से इस किस्म की सरगर्मीयों में हिस्सा लेती है और ये मामूल के मुताबिक़ अमल था।

बी जे पी ने कहा कि ऐसे फ़ौज और हुकूमत की जानिब से अख़बारी इत्तेला के बारे में वज़ाहत से सदाक़त का यक़ीन हो गया है। ताहम इसरार किया कि वज़ीर-ए-आज़म को पूरी सरगर्मी से वज़ारत-ए-दिफ़ा और मुसल्लह अफ़्वाज के दरमयान तवाज़ुन बरक़रार रखना चाहीए।

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