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बीफ और बकरे के गोश्त में वही फर्क जो बीवी और बहन में : गिरिराज सिंह

पटना : बिहार की सियासत में बीफ एक बड़ा मुद्दा बन गया है। आये दिन कोई ना कोई लीडर बीफ पर कुछ बयान दे ही देता है। लालू ने जब कहा था कि हिंदू भी बीफ खाते हैं और बीफ और दीगर गोश्त में कोई फर्क नहीं है। तब भाजपा के गिरिराज सिंह ने उनको फर्क समझाते हुए कहा कि बीफ और बकरे के गोश्त में बहन और बीवी जैसा फर्क है। बिहार के लीडरों की तनकीद और तबसीरह से लगता है कि वहां फिलहाल बीफ के अलावा दूसरा कोई मुद्दा है ही नहीं। गिरिराज सिंह ने आरजेडी सरबराह लालू प्रसाद के गुजिशता सप्‍ताह दिये बयान पर अब दोबारा तनकीद की है। गिरिराज ने बिहार के नवादा में लालू प्रसाद को गाय और बकरी के गोश्त का फर्क समझाया है।

गिरिराज ने कहा कि बकरी और गाय के मीट में हमारी एहसास और मजहब उसी तरह से है, जैसे हमारी बहन और हमारी बीवी दोनों पूजनीय हैं। लेकिन दोनों के एहसास अलग-अलग हैं। लालू प्रसाद क्या मजाक कर रहे हैं। कह रहे हैं कि जो बकरी का मीट खाता है वो गाय का मीट खाएगा। लालू ने कहा था कि गोश्त खाने वाले को इससे क्या फर्क पड़ता है कि वह गाय का गोश्त खा रहा है या बकरे का? हिंदू भी बीफ खाते हैं।

उन्‍होंने कहा कि किसी को भी गोश्त नहीं खाना चाहिए। यह खराबी करता है। इससे बीमारी होती है। इसके बाद भी गिरिराज ने उनसे यह बयान वापस लेने की मांग की थी। हालांकि बाद में लालू ने कहा कि मैने गोश्त खाने की बात कही थी बीफ खाने की बात नहीं की। उन्‍होंने इसपर मीडिया को गाली भी दी और कहा कि कोई शैतान है जो मेरे मुंह में ये सब बात डालकर बुलवा रहा है। मैने कभी भी बीफ खाने वाली बात नहीं की।

अब अगर सनीचर की बात करें तो राजद के लीडर रघुवंश प्रसाद सिंह ने कहा, हमारे ऋषि-महर्षि भी गाय का मांस खाते थे। इसके बाद सियासी हलकों में हड़कंप मचा हुआ है। कोई राजद के पूरे कुनबे को पागल बोल रहा है तो कोई सुबूत मांगता नजर आ रहा है। इधर साबिक़ नायब वजीरे आला सुशील कुमार मोदी ने नीतीश कुमार पर इल्ज़ाम लगाते हुए कहा है कि नीतीश कुमार गाय का गोश्त को क़ौमी खाना का एलान करवाना चाहते हैं।

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