Friday , October 20 2017
Home / Khaas Khabar / 10 करोड़ मुलाज़्मीन हड़ताल पर

10 करोड़ मुलाज़्मीन हड़ताल पर

नई दिल्ली, 20 फरवरी: मुल्क में आज से हो रही दो दिन की जनरल स्ट्राइक का आम जिंदगी पर खास असर दिखा सकता है। अपनी मांगों को लेकर 11 ट्रेड यूनियनों की ओर से बुलाई गई इस हड़ताल से कई रियासतों में ट्रांसपोर्ट और बैंकिंग खिदमात ठप रहने के आसार

नई दिल्ली, 20 फरवरी: मुल्क में आज से हो रही दो दिन की जनरल स्ट्राइक का आम जिंदगी पर खास असर दिखा सकता है। अपनी मांगों को लेकर 11 ट्रेड यूनियनों की ओर से बुलाई गई इस हड़ताल से कई रियासतों में ट्रांसपोर्ट और बैंकिंग खिदमात ठप रहने के आसार है, जिससे लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।

हड़ताल से मआसियत को करीब 20 हजार करोड़ रुपये के नुकसान का बड़ा झटका लगने की आशंका है जबकि बैंकों में 80 लाख चेकों के अटकने से करीब 50 हजार करोड़ रुपये का ट्रांजेक्शन मुतास्सिर हो सकता है।

इसके मद्देनजर हुकूमत के साथ अब इंडस्ट्री भी इस स्ट्राइक को गैरजरूरी बताते हुए इसे वापस लेने की अपील की है। लेकिन हुकूमत और मजदूर संगठनों के बीच बातचीत बेनतीजा रहने के बाद 20 और 21 फरवरी को मुल्कगीर हड़ताल होना तय है।

भाकपा नेता गुरुदास दास गुप्ता ने कहा कि वज़ीर ए दिफा एके एंटनी समेत वुजराओ के साथ हुई मुज़ाकरात में हुकूमत ने कोई ठोस पहल नहीं की, जिसके वजह से ट्रेड यूनियनों को बंद करने का फैसला लेना पड़ रहा है। दूसरी ओर CII के डायरेक्टर जनरल् चंद्रजीत बनर्जी ने हड़ताल को गैर ज़रूरी बताते हुए इससे बड़े पैमाने पर माली नुकसान की आशंका जताई है।

इंडस्ट्री तंज़ीम के मुताबिक दो दिन की हड़ताल से मआसियत को 15 से 20 हजार करोड़ रुपये का नुकसान हो सकता है। एसोचैम के सदर राजकुमार धूत का कहना है कि मआसियत चुनौतीपूर्ण हालात से गुजर रही है। ऐसे में हड़ताल जीडीपी पर बड़ा असर डालेगी।

इंडस्ट्री तंज़ीम फिक्की का कहना है कि ट्रेड यूनियनों की तशवीश का हल हड़ताल के जरिए नहीं हो सकता है। इस बीच हुकूमत ने बैंक मुलाज़्मीन से हड़ताल पर नहीं जाने की अपील की है।

माना जा रहा है कि 90 हजार बैंक ब्रांचो के 10 लाख मुलाज़्मीन हड़ताल में शामिल होंगे। जबकि 10 करोड़ कामगारों के इसमें शामिल होने के इम्कान भी है।

दिल्ली, उत्तर प्रदेश के कई हिस्सों, हरियाणा, पश्चिम बंगाल, केरल, महाराष्ट्र, तमिलनाडु और कर्नाटक में हड़ताल का असर पड़ सकता है।

रेल और बस खिदमात मुतास्सिर होने से मुसाफिरों को बड़ी दिक्कत हो सकती है। बंदरगाहों पर असर पड़ सकता है। बैंकों में चेक क्लीयरेंस समेत दूसरे काम ठप रह सकते हैं।

हुकूमत ने बैंक के मुलाज़्मीन से हड़ताल में शामिल नहीं होने की अपील की है। फिनांस मिनीस्ट्री की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि बैंकों में लगातार बड़ी तादाद में रोजगार दिए जा रहे हैं। बैंक मुलाज़्मीन का पे स्केल भी अच्छा है। इसलिए बैंक के मुलाज़्मीन के हड़ताल में शामिल होने का कोई वजह नहीं है।

ट्रेड यूनियनों ने दस मांगें सरकार के सामने रखीं हैं, जिनमें से ज्यादातर मांगें महंगाई रोकने, रोजगार पैदा करने, पब्लिक सेक्टर के उपक्रमों में Disinvestment के अमल को रोकने , लेबर कानूनों के अमल से मुताल्लिक हैं।

ट्रेड यूनियनों के इस हड़ताल के बीच डीटीसी आम लोगों को राहत देने के लिए तैयार है। डीटीसी निज़ाम और डिम्ट्स ने लोगों की परेशानी कम करने के लिए ज़्यादा से ज़्यादा बसों को सड़कों पर उतारने कि हिदायत दी है । अफसरों, ड्राइवरों और कंडक्टरों को अलर्ट रहने का हुक्म जारी कर दिया गया है। स्टाफ की छुट्टियां भी रद्द कर दी गई हैं।

TOPPOPULARRECENT