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10 दिन की मासूम जिंदा दफन होते होते बची

अलीगढ़, 18 जून: रोंगटे खड़े कर देने वाली इस कहानी का असली सच खुदा ही जानता है या फिर वे दोनों जो इस बच्ची को जिंदा दफन करने आए थे। क्या वे मां-बाप थे?

अलीगढ़, 18 जून: रोंगटे खड़े कर देने वाली इस कहानी का असली सच खुदा ही जानता है या फिर वे दोनों जो इस बच्ची को जिंदा दफन करने आए थे। क्या वे मां-बाप थे? बमुश्किल दस दिन की इस शीरखार (दुधमुंही) बच्ची की नसीब में जीना लिखा था। सो, दफनाते वक्त एक लड़के की नजर पड़ गई तो उसने शोर मचा दिया। दफनाने वाले भाग गए। बच्ची सेहतमंद है। हां, वो बोल नहीं सकती, मगर उसकी आंखें किसी को ढूंढ रही हैं..अपनी मां को।

यह वाकिया अलीगढ़ जिला मुख्यालय से करीब 30 किलोमीटर दूर खैर इलाके में गौमत चौराहे के पास की है। पीर के दिन दोपहर करीब तीन बज रहे थे। अचानक एक बाइक यहां आकर रुकी। बाइक पर एक खातून और एक मर्द सवार थे । खातून की गोद में एक शीरखार बच्ची भी थी।

सड़क के किनारे बाइक खड़ी करने के बाद इस शख्स ने बच्ची को अपनी गोद में ले लिया। खातून वहीं खड़ी रही। शख्स ने सड़क से करीब 25 मीटर दूर एक खेत में गढ्डा खोदा और बच्ची को उठाकर उसमें डाल दिया और फिर ऊपर से मिट्टी डालने लगा।

इसी बीच, अपनी छत से यह नजारा देख रहा 12 साल का लड़का संजीव बेटा वल्द नंद किशोर ने शोर मचा दिया। शोर सुनकर आसपास के लोगों को आता देखकर शख्स बच्ची को छोड़कर बाइक की ओर भागा। जब तक लोग पहुंचते वो खातून के साथ बाइक से जंट्टारी की ओर भाग गया।

बच्ची को उठाकर डॉक्टर के पास लाया गया। डॉक्टर ने बच्ची का चेकअप किया तो वो बिल्कुल सेहतमंद थी। इत्तेला मिलते ही सोफा चौकी से पुलिस भी आ गई। पुलिस ने देखभाल के लिए बच्ची को डॉ. नंद किशोर को सौंप दी है। डॉक्टर के घर पर बच्ची को देखने वालों का तांता लगा हुआ था।

बशुक्रिया: जागरण

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