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10 रुपये की जगह 500 का खरीदना पड़ रहा है स्टांप

जिले में स्टांप की किल्लत हो गयी है। गुजिशता दस दिनों से दस से लेकर एक सौ रुपये का स्टांप नहीं मिल रहे हैं.

जिले में स्टांप की किल्लत हो गयी है। गुजिशता दस दिनों से दस से लेकर एक सौ रुपये का स्टांप नहीं मिल रहे हैं. लिहाजा ब्लैक में स्टांप की बिक्री हो रही है। कुछ वेंडरों के पास पांच सौ व हजार रुपये के कुछ स्टांप हैं। बहुत ज़रूरी होने पर लोगों को मजबूरन पांच सौ व हजार का स्टांप लेना पड़ रहा है। जिले में 32 लाइसेंसी वेंडर है, इनमें महज़ 11 वेंडर की हैं. हैं।

पहले पोस्ट ऑफिस से स्टांप की बिक्री होती थी। लोगों को आसानी से मिलता था। लेकिन गुजिशता दो साल से पोस्ट ऑफिस में स्टांप मिलना बंद हो गया है। लिहाजा कुछ वेंडरों की मनमानी चलने लगी है। स्टांप की किल्लत का बहाना बना कर ब्लैक में सारफीन को स्टांप बेचते हैं। सारफीन का कहना है की आये दिन स्टांप की किल्लत की मार से परेशान रहते हैं। हुकूमत को ई स्टांप की इंतेजाम करनी चाहिए। इससे ना तो ट्रेजरी का झंझट होगा ना ही वेंडरों की मनमानी चलेगी।

स्टांप की किल्लत से कई काम मुतासीर हो रहे हैं। खास तौर पर एग्रीमेंट का काम पूरी तरह ठप है। हलफनामा काम भी मुतासीर हो रहा है। एंटी रेकिंग एग्रीमेंट व गैस एजेंसी के एग्रीमेंट की अमल भी मुतासीर है।

ट्रेजरी से एक-दो दिनों में 12 हजार स्टांप निकलेंगे। ज़राये के मुताबिक गुजिशता एक हफ्ताह से जिला खजाना ओहदेदार छुट्टी पर थे। इसकी वजह से ट्रेजरी से स्टांप नहीं निकल पा रहा था। जिला खजाना ओहदेदार छुट्टी से लौट आये हैं। बारह हजार स्टांप तैयार है। सिर्फ दस्तखत होना बाकी है। पीर को स्टांप की किल्लत नहीं होगी।

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