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12 फ़ीसद तहफ़्फुज़ात की तहरीक को कमज़ोर करने की साज़िशों के ख़िलाफ़ चौकसी ज़रूरी

हैदराबाद 28 अक्टूबर: तेलंगाना में ग़रीबी-ओ-पसमांदगी के शिकार मुस्लमानों को तालीम-ओ-रोज़गार के शोबों में 12 फ़ीसद तहफ़्फुज़ात की फ़राहमी के लिए रोज़नामा सियासत की मुहिम की मक़बूलियत से ख़ौफ़ज़दा फ़िर्कापरस्त ताक़तें रियासत से लेकर मर्कज़ी सतह पर मुस्लमानों की इस ग़ैर सियासी तहरीक को कमज़ोर करने की साज़िशों का आग़ाज़ कर चुकी हैं। वाज़िह रहे कि रोज़नामा सियासत ने तेलंगाना में मुस्लमानों को उनकी पसमांदगी और आबादी के तनासुब के मुताबिक़ 12 फ़ीसद तहफ़्फुज़ात के हुसूल के लिए मुहिम का आग़ाज़ किया था और रोज़-ए-अव्वल से ही ये मुतालिबा रहा कि दस्तूरी तक़ाज़ों को मलहूज़ रखते हुए मुस्लमानों की पसमांदगी का जायज़ा लेने के लिए बी सी कमीशन क़ायम किया जाये और इस की सिफ़ारिश के मुताबिक़ तहफ़्फुज़ात फ़राहम किए जाएं।

ताहम रियासती हुकूमत इस मसले पर दिल बहलाने वाले यकीन के ज़रीये टाल मटोल का रवैया इख़तियार कर रही है। एक मरहले पर ये भी कहा गया था कि तेलंगाना के मुस्लमानों को 12 फ़ीसद तहफ़्फुज़ात की फ़राहमी के मसले पर वज़ीर-ए-आज़म नरेंद्र मोदी से रुजू किया जाएगा। जिससे इस वादे की पाबंदी मशकूक हो गई है और मुस्लमानों को अपने दस्तूरी हुक़ूक़ से महरूमी के अंदेशों में इस वक़्त मज़ीद इज़ाफ़ा हो गया जब वज़ीर-ए-आज़म मोदी ने पिछ्ले रोज़ बिहार में बी जे पी के इंतेख़ाबी जलसों से ख़िताब के दौरान अज़ीम सेक्युलर इत्तेहाद पर तन्क़ीद के बहाने अपना ज़हन वाज़िह कर दिया कि अक़लियतों को मज़ीद तहफ़्फुज़ात नहीं दिए जाऐंगे।

वज़ीर-ए-आज़म ने ये इल्ज़ाम भी आइद किया कि बिहार के चीफ़ मिनिस्टर नतीश कुमार , यादव दर्ज फ़हरिस्त तबक़ात-ओ-क़बाईल के लिए मुख़तस हिस्से को कम करते हुए एक मख़सूस तबक़ा (मुस्लमानों) को पाँच फ़ीसद तहफ़्फुज़ात देना चाहते हैं और बी जे पी एसा होने नहीं देगी।

तेलंगाना में मुस्लमानों को वादे के मुताबिक़ 12 फ़ीसद तहफ़्फुज़ात की फ़राहमी के लिए रोज़नामा सियासत की मुहिम में मुस्लमानों के सरगर्म रोल और दुसरे सेक्युलर गोशों की भरपूर ताईद-ओ-हिमायत के पेश-ए-नज़र अब एक मुनज़्ज़म साज़िश के तहत इस मसले को लेत-ओ-लाल में रखने की कोशिश शुरू हो गई है जिससे मुस्लमानों को नाक़ाबिल बयान नुक़्सान होने का अंदेशा है।

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