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15 साल पुरानी गाड़ियों की खोज हुई शुरू

पटना : दारुल हुकूमत के महौलियात को पोलुशन से आज़ाद करने के लिए अब सरकार ने यह फैसला लिया है कि साल 2000 के पहले खरीदी गयी तमाम डीजल गाड़ियों को सड़क से हटाया जायेगा और इन गाड़ियों को अब रजिस्ट्रेशन व फिटनेस सर्टिफिकेट नहीं दिया जायेगा। जाती महकम जराये के मुताबिक वैसी गाड़ियों का जिला सतह पर रजिस्ट्रेशन पर रोक लगायी जायेगी।

ऐसे में दूसरे जिलों में भी ऐसी गाड़ियां नहीं चलेंगी। फिलहाल डीटीओ दफ्तर महकमा हुक्म का इंतजार कर रहा है, क्योंकि डीटीओ के यहां 15 साल पहले कंप्यूटराइज सिस्टम नहीं था। ऐसे में उन गाड़ियों का ब्योरा कंप्यूटर में नहीं होकर फाइलों में पड़ी होगी और उसे निकालने में वक़्त लगेगा। दूसरी तरफ सनीचर को वज़ीरे आला की तजवीज बैठक के बाद यह फैसला हो जायेगा कि पटना या पूरे बिहार में यह मुहीम चलेगा। इसके बाद पी से तमाम जिला दफ्तरों में हुक्म की कॉपी भेज दी जायेगी। इधर ट्रांसपोर्टिंग कमिश्नर की हिदायत पर जुमा को जीरोमाइल व सगुना मोड़ के नजदीक फिटनेस व पुलिशन की जांच मुहीम चलाया गया। इसके तहत 233 बड़े गाड़ियों की जांच की गयी, जिसमें 42 अनफिट पाये गये।

15 साल पुरानी डीजल गाड़ियों पर रोक लगने के बाद सबसे ज्यादा परेशानी स्कूली बच्चों व पुलिस को होगी। एक अनुमान के मुताबिक सबसे ज्यादा अनफिट गाड़ियों का इस्तेमाल स्कूल व सरकारी दफ्तरों में होता है। उसी खटारा गाड़ियों से बच्चे व अफसर अपना काम करते हैं। दूसरी तरफ पुलिस थानों में बहुत-सी डीजल गाड़ियों का इस्तेमाल होता है, जो कि 15 साल से काफी ज्यादा पुरानी हो चुकी है।

सनीचर को वज़ीरे अआला की जायजा बैठक के बाद जो हिदायत दिया जायेगा, उसके मुताबिक काम होगा। फिलहाल इसको लेकर पहला स्टेज क्या होगा और किस तरह से 15 साल पुरानी डीजल गाड़ियों काे सड़क से बाहर किया जायेगा, इसको लेकर पीर से जाती महकमा का अमल शुरू हो जायेगी। नवीन चंद्र झा, डीटीओ कमिश्नर

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