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15 साल बाद भारत आ रही है गीता, गांव में भाई-बहन कर रहे हैं इंतजार

पटना : भटक कर पाकिस्तान पहुंची गीता 15 साल बाद आज वापस अपने मुल्क लौट रही है। बीमारी के बावजूद गीता के वालिद जनार्दन महतो दिल्ली में उसका इंतजार कर रहे हैं। दिल्ली में उसका डीएनए टेस्ट कराया जाएगा। डीएनए टेस्ट से साबित होने पर ही गीता को जनार्दन से साथ सहरसा भेजा जाएगा।
गीता (बचपन का नाम हीरा और हीरामणि) के वापस आने की खबर से सहरसा जिले की चिरैया ओपी की कबीरा धाप गांव में सुबह से रौनक है। गांव के लोग गीता के घर पर जुटे हैं। सबको एक ही आस है कि कब गीता गांव आएगी। घर पर गीता के सभी भाई-बहन और रिश्तेदार जुटे हुए हैं। सबकी नजर सड़क की तरफ है। कोई कार जैसे ही गांव की तरफ आती है, लोग देखने लगते हैं कि शायद गीता आ गई।

गीता के वालिद जनार्दन महतो के पंजाब के लुधियाना में काम करते थे। उनकी बेटी गीता गूंगी-बहरी है। उसकी पीठ पर मस्सा और ललाट पर तिल के निशान हैं। बचपन में गीता के भौंहों के बीच में गोदना का निशान था जो बड़े होने की वजह से खिसक गया है।

सहरसा के जनार्दन महतो के अलावा दो और खानदान गीता को अपनी बेटी बता रहे हैं। गूंगी बहरी होने की वजह से गीता अपने बात ठीक से कह नहीं पा रही है। इसी लिए वजीरे खारजा ने डीएनए टेस्ट कराने का फैसला किया है, जिससे गीता अपने असली वालिदैन के घर जा सके।

गीता के घर छोड़ने के कुछ वक़्त बाद ही उसके शौहर उमेश महतो ने दूसरी शादी कर ली थी। यानी डीएनए टेस्ट के बाद अगर वह घर लौटी तो उन्हें अकेले ही अपना ज़िंदगी गुज़र बसर करना पड़ेगा। बचपन में ही गीता की शादी कबीरा पंचायत के धाप बाजार के रहने वाले उमेश महतो के साथ हुई थी। कुछ वक़्त बाद दोनों पंजाब चले गए। शौहर उमेश वहां दिहाड़ी मजदूरी करता था।
गीता के भाई बलराम के मुताबिक घरेलू झगड़े के दरमियान घर छोड़ कर गीता के लापता होने के बाद गृहस्थी भी उजड़ गई। शौहर पंजाब छोड़ घर लौट आया और दूसरी शादी कर ली। कुल मिला कर गीता के घर लौटने की इंतज़ार के दरमियान रिश्तों की पहचान बदल चुकी है। अब उन्हें यहां नए सिरे से जिंदगी की शुरुआत करनी होगी।

 

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