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1993 बम धमाकों के मुजरिम को उबूरी राहत देने से इनकार

मुंबई: बामबए हाईकोर्ट ने1993 में सिलसिला-वार बम धमाकों के मुजरिम इब्राहीम मूसा चौहान को जेल से रिहाई के लिए उबूरी राहत देने से इनकार कर दिया है जोकि फ़िलहाल फ़िल्मी अदाकार संजय दत्त को असलाह सरबराह करने जेल की सज़ा भुगत रहें है। चौहान ने अपने वकील फ़रहान शाह के ज़रिये हाइकोर्ट से रुजू हो कर मुंबई की टाडा अदालत में 10 साला सज़ाए क़ैद की माफ़ी की मंसूख़ी को चैलेंज किया था जहां उसकी अर्ज़ी पर क़तई फ़ैसला मारज़ अलतवा है जिसने जेल से रिहाई के लिए उबूरी राहत देने की इस्तिदा की है।

कारगुज़ार चीफ़ जस्टिस वी के ताह्हुल रमणी और जस्टिस शालीनी भनसालकर जोशी पर मुश्तमिल बेंच ने चौहान की पेश करदा अर्ज़ी को समाअत के लिए क़बूल कर लिया। आइन्दा समात की तारीख़ 31 मार्च मुक़र्रर की है। बेंच ने सज़ायाफ़्ता मुल्ज़िम को उबूरी राहत देने से इनकार कर दिया।

इब्राहीम मूसा चौहान उर्फ़ बाबा चौहान को बेहतरीन चाल चलन पर 10 साला सज़ाए क़ैद को माफ़ कर दिया गया था और उसे नवंबर 2015 में रहा कर दिया गया था। लेकिन इन्सपेक्टर जनरल महाबस ने हाल ही में माफ़ी सज़ाए क़ैद को मंसूख़ कर दिया और कहा था कि मुल्ज़िम हाईकोर्ट से रुजू हो सकता है अगर टाडा अदालत ने मूसा को 5 साल की सज़ाए क़ैद सुनाई थी।

लेकिन जेल में इस के बेहतरीन चाल-ओ-चलन दीगर कामों के पेश-ए-नज़र सज़ाए क़ैद में 18 माह की तख़फ़ीफ़ कर दी थी। मूसा ने फ़िल्मी अदाकार संजय दत्त की मिसाल पेश करते हुए कहा कि संजय दत्त की सज़ाए क़ैद को जिस तरह माफ़ कर दिया गया है उसे भी ये सहूलत फ़राहम की जाये

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