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1993 ब्लास्ट : सुप्रीम कोर्ट में अपील खारिज,याकूब को 30 को होगी फांसी

1993 के मुम्बई बम धमाके में फांसी की सजायाफ्ता टाइगर मेमन के भाई याकूब अब्दुल रज्जाक मेमन को फांसी दी जाएगी। सुप्रीम कोर्ट ने मेमन की क्यूरेटिव पिटीशन खारिज कर दी है। अब याकूब को 30 जुलाई को फांसी हो होगी।

यह मामला चीफ जस्टिस एच.एल. दत्तू, जस्टिस टी.एस. ठाकुर और जस्टिस ए.आर. दवे की बेंच के पास था। इस अपील के खारिज होने के साथ याकूब के लिए राहत के सारे रास्ते बंद हो गए हैं।

इससे पहले 9 अप्रैल को नज़रे सानी दरखास्त को खारिज करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने उसकी फांसी बरकरार रखी थी, इसके साथ ही उसकी फांसी पर लगी रोक भी हट गई थी। मेमन ने फांसी की सज़ा को उम्र कैद में बदलने की मांग की थी।
याकूब के वकीलों की दलील थी कि वो सिर्फ धमाकों की साजिश में शामिल था न कि धमाकों को अंजाम देने में।

याकूब की याचिका खारिज होने के साथ ही उसे कभी भी फांसी देने का रास्ता साफ हो गया था क्योंकि पिछले साल सदरे जम्हूरिया उसकी दया याचिका खारिज कर चुके हैं। इससे पहले 21 मार्च 2013 को सुप्रीम कोर्ट स्पेशल कोर्ट के फांसी की सजा को बरकरार रखने का फैसला सुना चुका है।

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