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2016 में भी 1948? UN में पाकिस्तान ने फिर उठाया हैदराबाद का मुद्दा

यूनाइटेड नेशन : यूं तो ये 2016 है और हैदराबाद के एक शहरी सैयद अकबरुद्दीन यूनाइटेड नेशन में हिन्दुस्तान के नुमाइंदे भी हैं लेकिन पाकिस्तानी हुकूमत को आज भी 1948 की याद आ रही है.

पाकिस्तान आज भी उस सवाल को ज़िंदा रखना चाहता है जिसका जवाब 1948 में लिखा जा चुका है, पाकिस्तानी नुमाइंदे मलीहा लोढ़ी इस बारे में यूनाइटेड नेशन में अपना पक्ष रखते हुए कहते हैं कि वो तीन आइटम्स को सिक्यूरिटी कौंसिल में लाना चाहते हैं, इनमें से एक मुद्दा हैदराबाद का भी है.

असल में जब हिंदुस्तान और पाकिस्तान का बंटवारा हुआ तो हैदराबाद समेत कुछ रियासतों को उनकी मर्ज़ी के मुताबिक़ हिंदुस्तान या पाकिस्तान में शामिल होने की आज़ादी मिली, उनको ये भी आज़ादी रही कि वो चाहें तो किसी के साथ न जाएँ.

हिन्दू मेजोरिटी वाले हैदराबाद के निज़ाम मीर ओसमान अली ख़ान सिद्दीक़ी असफ़ जाह VII ने शुरुवात में हिन्दुस्तान में शामिल होने से मना कर दिया. उस वक़्त वहाँ के लोगों ने इन्क़लाबी रुख़ इख्तियार किया और इन सब में हिन्दुस्तानी फ़ौज हैदराबाद स्टेट में दाख़िल हो गयी. हालांकि बाद में में निज़ाम ने अपनी शिकायत वापिस ले ली और हिन्दुस्तान के साथ उन्होंने एक समझौता कर लिया.

इतने सालों बाद जबकि तेलंगाना की दारुल हुकूमत हैदराबाद को लोग साईबराबाद के नाम से पुकारने लगे हैं और यहाँ के लोग सियासत के उस पढ़ाव से वापिस आ चुके हैं, पाकिस्तान इस मुद्दे को बार बार सिक्यूरिटी कौंसिल में उठा के ना जाने क्या साबित करना चाहता है

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