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27 साल में2.2 लाख फलस्तीनी सुकूनत के हक(right to live) से महरूम

इसराईल ने 1967 से 1994 के दौरान 27 साल के अर्सा में मग़रिबी (पश्चिमी) किनारे और ग़ज़ा पट्टी से ताल्लुक़ रखने वाले तक़रीबन ढाई (2.5) लाख फ़लस्तीनीयों को उन के हक़ सुकूनत (right to live) से महरूम (वंचित) किया।

इसराईल ने 1967 से 1994 के दौरान 27 साल के अर्सा में मग़रिबी (पश्चिमी) किनारे और ग़ज़ा पट्टी से ताल्लुक़ रखने वाले तक़रीबन ढाई (2.5) लाख फ़लस्तीनीयों को उन के हक़ सुकूनत (right to live) से महरूम (वंचित) किया।

इस बात का इन्किशाफ़ इसराईली रोज़नामा हॉरिट्ज़ में शाए रिपोर्ट में किया गया है। इस रिपोर्ट के मुंदरिजात (contents) के मुताबिक़ सिहूनी ममलकत (राष्ट्र) ने अपने एक क़ानून के तहत ग़ज़ा पट्टी से ताल्लुक़ रखने वाले एक लाख और मग़रिबी (पश्चिमी) किनारे से ताल्लुक़ रखने वाले एक लाख, चालीस हज़ार से ज़्यादा फ़लस्तीनीयों को इन 27 बर्सों में हक़ सुकूनत (right to live)से महरूम (वंचित) कर दिया था।

अपने ही आबाई इलाक़ों और मकानों से बेदख़ल होने वाले इन फ़लस्तीनीयों में ज़्यादा तर तलबा और नौजवान पेशावर लोग शामिल थे जो रोज़गार के सिलसिला में बैरून-ए-मुल्क गए और हमेशा के लिए वहीं के हो कर रह गए क्योंकि इसराईल के एक काले क़ानून के तहत उन की वापसी की राहें मस्दूद कर दी गईं और उन्हें उन के आबाई इलाक़ों में लौटने से रोक दिया गया।

रिपोर्ट के मुताबिक़ इसराईली वज़ारत (मंत्रालय)-ए-दिफ़ा (रक्षा मंत्रालय) के एक राबिता (संपर्क) दफ़्तर ने ग़ज़ा और मग़रिबी (पश्चिमी) किनारे के मकीन मगर बेदख़ल किए गए फ़लस्तीनीयों से मुताल्लिक़ आदाद-ओ-शुमार(आँकड़े) इंसानी हुक़ूक़ के लिए काम करनेवाली एक इसराईली तंज़ीम हामोकड की दरख़ास्त पर जारी किए हैं।

इसराईली क़ानून के तहत ग़ज़ा पट्टी से सात साल या इस से ज़्यादा अर्से तक बाहर रहने वाले 44,730 अहल ग़ज़ा का हक़ सुकूनत (right to live)सल्ब कर लिया गया। 54,730 को महिज़ इस बिना पर ग़ज़ा में सुकूनत से महरूम (वंचित) कर दिया गया कि उन्हों ने इसराईल के तहत 1981 की मर्दुम शुमारी के मौक़ा पर कोई जवाब नहीं दिया था।

बाक़ी 7,249 ने 1988 की मर्दुम शुमारी के वक़्त कोई जवाब नहीं दिया था। इस लिए उन से भी हक़ सुकूनत (right to live)छीन लिया गया। हॉरिट्ज़ की रिपोर्ट में बताया गया है कि हक़ सुकूनत (right to live)से महरूम (वंचित) होने वाले 15 हज़ार फ़लस्तीनीयों की उमरें उस वक़्त 90 साल या इस से ज़्यादा हो चुकी हैं।

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