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बेटे ने किया बीमार माँ को अपना लीवर दान कर भी नहीं बचा पाया जान

जामिया नगर में एक होनहार बेटे ने अपनी बीमार माँ को लीवर दान दे कर की उनको जीवनदान देने की कोशिश असफल रही। जोगा बाई के निवासी शाह आलम की माँ पिछले दो साल से लीवर के रोग से पीड़ित थी। पिछ्ले कुछ दिनों में ज़्यादा तबियत बिगड़ने के कारण उनको दिल्ली के अपोलो अस्पताल ने भर्ती कराया गया था। जहा पर डॉक्टरों ने बताया की उनकी माँ का लीवर फेल हो चूका है और अब लीवर प्रतिरोपण होना ही इसका एकमात्र इलाज है।

यह सुनते ही बेटे शाह आलम ने अपनी माँ को लीवर दान करने में ज़रा सी झिझक नहीं दिखाई और अपने लीवर का 75 प्रतिशत हिस्सा बेटे ने अपनी माँ को जीवन दान देने के लिए दान कर दिया। लेकिन बेटे का यह जीवनदान देने का फैसला पुरी तरह असफल रहा और शाम 6 बजे शाह आलम की माँ ने अस्पताल में डैम तोड़ दिया।

शाह आलम राजपूत जो की ओखला के जोगा बाई का निवासी है उसने सियासत के संवादाता से बात करते हुए बताया की 29 दिसंबर को उसकी माँ के लीवर का प्रतिरोपण हुआ था और तब से वो काफी स्वस्थ थी। आलम ने आगे बात करते हुए बताया की दो साल पहले माँ का लीवर फेल होने के बाद उनका इलाज पिछले दो साल से चल रहा था। मैंने अपने लिवर का 75 प्रतिशत हिस्सा अपनी माँ को दान दिया था। 29 दिसंबर को सफल ऑपरेशन के बाद से उनको आईसीयू में रखा गया था लेकिन बुधवार को अचानक से उनकी तबियत बिगड़ गयी और डॉक्टरों ने बताया की माँ की किडनी और शरीर के बाकी हिस्से भी प्रभावित हो चुके हैं इसलिए उन्हें वेंटिलेटर पर रखा गया था और सुबह में उनकी म्रत्यु हो गयी।

शाह आलम जामिया यूनिवर्सिटी के भूतपूर्व छात्र हैं और ओखला की पार्टी एमआईएम के सदस्य के साथ साथ सामाजिक कार्यकर्ता भी हैं। उनके दो भाई और दो बहन है जो की विवाहित हैं। शाह आलम ने बताया की उनकी माँ का सपना था की उनकी भी शादी हो जाए और लीवर की बीमारी के बाद से वो लगातार मुझसे शादी करने को कहते रहती थी।शाह आलम की माँ को बड़ी संख्या में पहुंचे बटला हॉउस के निवासी एवं क्षेत्रीय नेताओ द्वारा बटला हाउस के कब्रिस्तान में दफनाया गया।

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