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अहमदाबाद ब्लास्ट केस में कोर्ट ने 4 मुस्लिम युवकों को आतंक के आरोप से किया बाइज्ज़त बरी

औरंगाबाद की विशेष सत्र अदालत ने सोमवार को फैसला सुनाते हुए चार मुस्लिम युवाओं को आतंक के आरोपों से बरी कर दिया है।

आरोपी शेखर खिलजी, अबरार शेख, ज़फर कुरैशी और अनवर खत्री को 26 मार्च 2012 को हुए हिमायत बॉघ एनकाउंटर मामले में गिरफ्तार किया गया था, जिसमें महाराष्ट्र एटीएस ने मौके पर अजहर खत्री को मार गिराया था।

आरोपियों के खिलाफ गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम 1967 (यूएपीए), आईपीसी की धारा 307, 353 और 34 और शस्त्र अधिनियम की धारा 3, 25 के तहत औरंगाबाद की विशेष सत्र अदालत में मुकदमा चलाया गया।

मार्च 2017 में आरोपियों की मांग पर जमियत उलामा-ए-महाराष्ट्र ने इस केस की कमान संभाली। जिसके बाद न्यायाधीश वीवी पाटिल ने इस केस में तेज़ कार्यवाही शुरु कर दी।

सोमवार को आए फैसले ने सभी चार आरोपियों को यूएपीए से बरी कर दिया है, लेकिन शेखर खिलजी और अबरार शेख को आईपीसी की धारा 307 में ही दोषी ठहराया है।

जमियत उलमा-ए-महाराष्ट्र ने फैसले पर खुशी जाहिर करते हुए यह उम्मीद जताई है कि बाकी के दोनों को भी जल्द ही दोषमुक्त कर दिया जाएगा।

जामियत उलामा-ए-महाराष्ट्र के चीफ हाफिज़ नदीम सिद्दीकी ने कहा, “यह समुदाय के लिए एक बड़ी कामयाबी है कि सभी आरोपियों को आतंकवाद के आरोपों से बरी कर दिया गया है। यह एक बार फिर से साबित हुआ है कि हमारा संगठन बेगुनाहों के लिए लड़ रहा है”।

बता दें कि बरी किए गए चारों युवकों पर 2008 के अहमदाबाद बम विस्फोट मामले में केस चल रहा था। इनपुट के आधार पर, महाराष्ट्र एटीएस ने 2012 में औरंगाबाद के हिमायत बॉघ इलाके में छापा मारा, जिसमें एटीएस ने एक आरोपी को मार गिराया था। इस मामले की जांच सीआईडी ने की थी।

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