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6 वोज़रा और आई ए एस ओहदेदारों को सुप्रीम कोर्ट की नोटिस

सुप्रीम कोर्ट ने आज आंधरा प्रदेश के इन छःवोज़रा और आठ आई ए एस आफ़िसरान को नोटिस जारी की है जिन्हें कांग्रेस के बाग़ी लीडर वाई एस जगन मोहन रेड्डी को इस वक़्त फ़ायदा पहूँचाने केलिए गैर कानूनी अहकाम जारी करने केलिए मूरिदे इल्ज़ाम ठ

सुप्रीम कोर्ट ने आज आंधरा प्रदेश के इन छःवोज़रा और आठ आई ए एस आफ़िसरान को नोटिस जारी की है जिन्हें कांग्रेस के बाग़ी लीडर वाई एस जगन मोहन रेड्डी को इस वक़्त फ़ायदा पहूँचाने केलिए गैर कानूनी अहकाम जारी करने केलिए मूरिदे इल्ज़ाम ठहराया गया है जब इन ( जगन ) के वालिद आँजहानी वाई एस राज शेखर रेड्डी चीफ मिनिस्टर के ओह्दे पर फ़ाइज़ थे ।

जस्टिस दलवीर भंडारी और जस्टिस दीपक मिश्रा पर मुश्तमिल बंच ने सी बी आई से इस इल्ज़ाम पर भी जवाब तलब किया है कि ये इदारा सयासी तहफ़्फुज़ात और दबाव के सबब वोज़रा और आला ओहदेदारों के ख़िलाफ़ एफ आई आर दर्ज करने में नाकाम हो गया है । एक ऐडवोकेट पी सुधाकर रेड्डी ने अपनी दरख़ास्त में कहा कि जगन के ग़ैर मुतनासिब असासों के मुक़द्दमामें सी बी आई ने आंधरा प्रदेश हाइकोर्ट की हिदायात पर 71 अफ़राद के ख़िलाफ़ एफ आई आर दर्ज किए हैं लेकिन यही इदारा इन वोज़रा और आला ओहदेदारों के ख़िलाफ़ मुक़द्दमादर्ज करने में नाकाम होगया है

जिन्हों ने साबिक़ चीफ मिनिस्टर के दौर में उन के बेटे को फ़ायदा पहूँचाने केलिए 26 ख़ुसूसी अहकाम जारी किए थे । सुप्रीम कोर्ट ने रियासती वोज़राजय गीता रेड्डी ( सनअतें ) ,धर्मना प्रसाद राव( माल ) , सबीता इंदिरा रेड्डी ( दाख़िला) , पोनाला लकशमया ( इन्फॉर्मेशन) , कन्ना लक्ष्मी नारायणा ( हाउज़िंग ) और मोपी देवी वेंकट वेंकट रमना (आबकारी) के ख़िलाफ़ नोटिस जारी किए हैं जबकि आई ए एस आफ़िसरान में मनमोहन सिंह , परिनसपाल सिक्रेटरी हाॶज़नग , वाई सिरी लक्ष्मी कमिशनर सेहत-ओ-ख़ानदानी बहबूद , एम सामेवल स्पैशल चीफ सिक्रेटरी माहौलयात , जंगलात ,

साईंस-ओ-टैक्नालोजी , आदिती नाथ दास सिक्रेटरी आबपाशी , एस वे प्रसाद वेजलनस कमिशनर , के रत्ना प्रभा ( कर्नाटक कैडर ) महिकमा माल-ओ-रीजनल कमिशनर (गुलबर्गा ) सी वएस के शर्मा परिनसपाल सिक्रेटरी बाग़बानी और साम बाब परिनसपाल सिक्रेटरी बलदी नज़म-ओ-नसक़-ओ-शहरी तरक्कियात शामिल हैं। वाज़ेह रहे कि ये तमाम वोज़रा और आई ए एस ओहदेदार , 2004 और 2009 के दरमियान उस वक़्त के चीफ मिनिस्टर राज शेखर रेड्डी के दौर में अहम ओहदों पर फ़ाइज़ थे ।

सुधाकर रेड्डी ने इन तमाम के ख़िलाफ़ एफ आई आर दर्ज करने की दरख़ास्त की थी लेकिन सी बी आई की ख़ोसूसी अदालत और आंधरा प्रदेश हाइकोर्ट की जानिब से इस दरख़ास्त को मुस्तर्द किए जाने के बाद उन्हों ने सुप्रीम कोर्ट में ख़ुसूसी दरख़ास्त दायर की थी । मिस्टर रेड्डी ने अपने दरख़ास्त में इस्तिदलाल पेश किया था कि हुकमनामे जारी करने वाले वोज़रा और सिक्रेटरीज़ के बारे में वाज़ेह इल्ज़ामात होने के बावजूद इन में से किसी एक के ख़िलाफ़ भी कोई मुक़द्दमा दर्ज नहीं किया गया है

जिस से बिलउमूम एसा मालूम होता है कि सी बी आई ये तास्सुर देने की कोशिश कर रही है कि राज शेखर रेड्डी ने तन-ए-तनहा रिश्वत सतानी का एक एसा जाल बनाया था जिस में मुताअद्दिद वोज़रा और आई ए एस ओहदेदार शामिल थे जिन्हों ने हज़ारों सफ़हात पर मुश्तमिल सरकारी दस्तावेज़ात तय्यार किए थे । इस दरख़ास्त में जगन के ख़िलाफ़ मुक़द्दमा में सी बी आई के एफ आई आर का हवाला दिया गया है

जिस में कहा गया है कि जगन मोहन रेड्डी ने अपने चीफ मिनिस्टर वालिद के असर-ओ-रसूख़ का इस्तिमाल करने के इलावा हुकूमत में शामिल दीगर वोज़रा और सरकरदा ओहदेदारों पर अपने इसरो रसूख़ का इस्तिमाल किया ताकि क़वाइद-ओ-क़वानीन की ख़िलाफ़वरज़ी करते हुए चंद मख़सूस-ओ-मुंतख़ब अफ़राद को फ़ायदा पहूँचाते हुए मुख़्तलिफ़ तरीकों से रिश्वत की दौलत हासिल कर सकें।

वाज़ेह रहे कि आंधरा प्रदेश हाइकोर्ट ने इस वक़्त के वज़ीर शंकर राव की दरख़ास्त पर कार्रवाई करते हुए 10 अगस्त 2011 को सी बी आई को जगन के ग़ैर मुतनासिब असासों की तहकीकात करने की हिदायत की थी।

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