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आखिर कोई CM का पड़ोसी बनकर बंगला नंबर 6 कालिदास मार्ग पर क्यों नहीं रहना चाहता?

वैसे तो हर कोई मुख्यमंत्री के पड़ोस में रहना चाहेगा। लेकिन लखनऊ में जो भी मुख्यमंत्री के पड़ोस में रहा उसके साथ भला नहीं हुआ।

मुख्यमंत्री आदित्यनाथ योगी के सरकारी आवास पांच कालिदास मार्ग पर पूजा और हवन के बाद उसमे उनके शिफ्ट होने की तैयारी चल रही हैं। कालिदास मार्ग पर मुख्यमंत्री के अलावा अन्य मंत्रियो के भी बंगले हैं।

लेकिन कालिदास मार्ग पर मौजूद एक बंगले में रहने के लिए कोई जल्दी तैयार नहीं होता हैं। बंगला नंबर छ:, कालिदास मार्ग पर मुख्यमंत्री आवास के ठीक मिला हुआ हैं। लेकिन इस बंगले के साथ अशुभ बातें जुडी हुई हैं. इस बार भी देखना है की कौन मंत्री इस बंगले में रहने आता हैं।

वैसे तो 6-कालिदास मार्ग पर रहने वाला मुख्यमंत्री का पड़ोसी होगा लेकिन आमतौर पर मंत्री अब इसमें रहने से कतराने लगे हैं। जो भी रहा उसके बुरे दिन शुरू हो गए।

शुरुवात में इस बंगले में अधिकारियो का ऑफिस बनाया गया। मुलायम सरकार में मुख्य सचिव रहीं नीरा यादव इसमें रहीं लेकिन उसी दौरान उनका नाम नोएडा प्लाट आवंटन घोटाले में आया और जेल तक जाना पड़ा। वरिष्ठ आई ए एस अधिकारी प्रदीप शुक्ल भी इसमें रह चुके हैं और उनका नाम भी एन आर एच एम घोटाले में आया और वो भी जेल गए।

बसपा सरकार में इस बंगले में सबसे मज़बूत मंत्री बाबु सिंह कुशवाहा रहने आये और आखिर में वो भी जेल चले गए।

मुलायम ने मुख्यमंत्री रहते हुए इस बंगले को अपने करीबी अमर सिंह को दिया लेकिन उसके बाद वो भी परेशान हुए, पार्टी से बाहर तक कर दिए गए। अखिलेश यादव ने अपने कार्यकाल में इस बंगले को वकार शाह मंत्री को दिया गया और वो बेचारे पिछले छ: महीने से कोमा में हैं। इस बंगले को उन्होंने भी खाली कर दिया।

अखिलेश ने फिर अपने विश्वस्त राजेंद्र चौधरी को ये बंगला दिया लेकिन चौबीस घंटे में ही उनका एक विभाग खाद और रसद हटा लिया गया और वो केवल राजनीतिक पेंशन मंत्री रह गए। चौधरी ने तुरंत ये बंगला खली कर दिया। उसके बाद इस बंगले को अखिलेश ने अपने दूसरे करीबी जावेद आब्दी को दिया लेकिन उनको भी अपने महतवपूर्ण पद प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से हाथ धोना पड़ा।

कुल मिला कर अब 6-कालिदास मार्ग में कोई रहना नहीं चाहता।

इसी तरह एक बंगला 22-गौतम पल्ली भी अभिशप्त माना जा रहा है। पिछली सरकार में जो मंत्री इसमें रहा उसको बर्खास्त होना पड़ा। शुरुवात राजा आनंद सिंह हुई वो हटा दिए गए, फिर शिवाकांत ओझा आये लेकिन वो भी मंत्री पद से बर्खास्त कर दिए गए फिर शादाब फातिमा आईं और वो भी बर्खास्त हो गयी।

इस बार फिर सबकी निगाहें लगी हैं कि कौन इन बंगलो में रहने आता हैं।

 

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