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ABVP: ख़िताब देश के सबसे बड़े छात्र-संगठन का, स्लोगन- ज्ञान, शील और एकता, काम- गुंडागर्दी करने का

आप चाहे राजनीति पर जितना भी कीचड़ उछाल लें, देश का बेड़ा गर्क होता देख राजनेताओं को कितनी भी जली कटी सुनाकर भीतर छटपटाती बौखलाहट को शांत कर लें लेकिन इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता कि देश को सुचारू रूप से चलाने के लिए राजनीति की प्रत्यक्ष भूमिका होती है।

वहीँ सियासी दल दुनिया के सबसे ‘युवा देश’ की सत्ता की तक पहुंचने के लिए युवा शक्ति का भरपूर इस्तेमाल करते हैं। और छात्र शक्ति-राष्ट्रशक्ति का नारा लगाने वाले छात्र संगठनों को संरक्षण देकर उसका इस हद तक राजनीतिकरण कर देते हैं कि देश, समाज और प्रजातान्त्रिक मूल्यों के झंडाबरदार माने जाने वाले छात्र संगठन किसी पार्टी या विचारधारा विशेष के पीछे लामबंद होते नज़र आते हैं।

बाद इसके सामाजिक सरोकार, एकता और छात्रहित से जुड़े मुद्दों पर लिखना-बोलना और अधिकारों के लिए लड़ना उनके लिए बेमतलब हो जाता है।

इन दिनों एक इसी प्रकार के छात्र संगठन के नाम से खूब सुर्खियाँ बन रहीं हैं। वह छात्र संगठन है अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी)। जिसको आजकल सोशल मीडिया पर लोग आरएसएस के बगलबच्चा संगठन सरीखे नामों से पहचान कर रहे हैं। आपको इस संगठन के बारे में बता दूं कि एबीवीपी को विश्व का सबसे बड़ा छात्र संगठन होने का खिताब हासिल है।

वैसे तो एबीवीपी की स्थापना 1948 में हो चुकी थी लेकिन औपचारिक रूप से इसकि स्थापना 9 जुलाई 1949 को हुई जब इसका पंजीकरण हुआ। इसकी स्थापना छात्रों और शिक्षकों के एक ग्रुप ने मिलकर की थी। अपने शुरूआती दौर में इसकी सक्रियता नाममात्र की ही थी लेकिन 1958 में मुंबई के प्रोफ़ेसर यशवंतराव केलकर को इसका मुख्य संयोजक बनाने के बाद इसकी सक्रियता काफी बढ़ गई और इसने देश भर में अपना विस्तार करना शुरू कर दिया। इसलिए प्रो० यशवंतराव केलकर को ही संस्थापक सदस्य माना जाता है।

एबीवीपी का आधिकारिक स्लोगन है– ज्ञान, शील और एकता। यानी कि इस छात्र संगठन और इसके सदस्यों से यह अपेक्षा की जाती है कि यह इन तीनो शब्दों को महज़ अल्फाज़ न मानकर उनके गहरे अर्थ की तासीर को आत्मसात करते हुए इनके प्रति प्रतिबद्ध रहें।

लेकिन बीते सालों में एबीवीपी इन तीनो शब्दों की पवित्रता का गला किस कदर घोटता चला आ रहा है। आइये उस पर एक नज़र डालते हैं-

23 अप्रैल 2011- एबीवीपी के कार्यकर्ताओं ने MTV Roadies के को-एंकर रघुराम को शिष्टाचार का पाठ पढ़ाते हुए उनके चेहरे पर स्याई फेक दी। कार्यकर्ता उनसे इस बात से नाराज़ थे कि वह अपने शो में अपमान जनक का भाषा का इस्तेमाल करते हैं।

8 अगस्त 2011 – एबीवीपी कार्यकर्ताओं ने झारखण्ड के दुमका ज़िले में एक मिशनरी स्कूल में उस समय जमकर तोड़-फोड़ की जब उसके प्रिंसिपल ने उनके कहने पर स्कूल बंद करने से मना कर दिया। एबीवीपी कार्यकर्ता अन्ना हजारे के समर्थन में सभी शिक्षण संस्थाएं जबरन बंद करा रहें थें।

4 अगस्त 2013- भारतीय फिल्म और टेलीविजन संस्थान, पुणे में डाक्यूमेंट्री ‘जय भीम कॉमरेड’ दिखाए जाने से नाराज़ एबीवीपी ने कबीर काला मंच पर नक्सलवादी होने का आरोप लगाते हुए हमला कर दिया। इतना ही नहीं कबीर काला मंच के सदस्यों से कहा गया कि वह जय नरेंद्र मोदी बोले।

30 दिसंबर 2014- असहिष्णुता के मुद्दे पर अपनी राय सार्वजनिक करने पर एबीवीपी सदस्यों ने अभिनेता आमिर खान की फिल्म पीके का न केवल पोस्टर फाड़ें बल्कि फिल्म को चलने से भी रोका और सिनेमा घरों में तोड़-फोड़ की।

अगस्त 2015- हैदराबाद केन्द्रीय यूनिवर्सिटी के छात्र रोहित वेमुला अम्बेडकर स्टूडेंट्स एसोसिएशन के सदस्य थे। इस संगठन ने यूनिवर्सिटी में ‘मुज़फ्फरनगर बाकी है’ नाम की एक फिल्म के प्रदर्शन के दौरान हुए हमले के विरोध में एक जुलूस निकाला था। उनका प्रवेश विश्वविद्यालय के हर सार्वजनिक स्थल पर प्रतिबंधित कर दिया गया था। एबीवीपी ने उनपर मारपीट करने का आरोप लगाया था। जिसके बाद रोहित ने आत्महत्या कर ली थी।

नवम्बर 2015- इलाहाबाद यूनिवर्सिटी के एबीवीपी पदाधिकारियों ने भाजपा के फायरब्रांड नेता सांसद योगी आदित्यनाथ को छात्रसंघ भवन का शुभारंभ करने के लिए आमंत्रित किया जिसका छात्रसंघ अध्यक्ष ऋचा सिंह ने विरोध किया। योगी को भेजे गये इस आमंत्रण के विरोध में धरने पर बैठी छात्रसंघ अध्यक्ष ऋचा सिंह और तमाम छात्र-छात्राओं के साथ एबीवीपी कार्यकर्ताओं ने अभद्रता की और छात्राओं पर आपत्तिजनक टिप्पणी की।

फ़रवरी, 2016- जेएनयूएसयू के पूर्व अध्यक्ष कन्हैया कुमार के समर्थन में बीएचयू के बाहर प्रदर्शन करने पर आइसा के कार्यकर्ता कुमार मंगलम के साथ एबीवीपी के लोगों ने मारपीट की।

नवम्बर, 2016- जेएनयू छात्र नजीब अहमद का ममना इन दिनों सुर्ख़ियों में हैं। उत्तर प्रदेश के बदायूं का रहने वाला नजीब (27) जेएनयू में स्कूल ऑफ बायोटेक्नोलॉजी का छात्र है और वह विश्वविद्यालय परिसर में विक्रांत सहित एवीपी के कार्यकर्ताओं के साथ हुई कथित हाथापाई के एक दिन बाद यानी 15 अक्तूबर से लापता है।

फरवरी, 2017- दिल्ली विश्वविद्यालय के रामजस कॉलेज मंगलवार को जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के छात्र उमर खालिद और छात्रा शेहला राशिद को बुलाने का आमंत्रण रद्द कर दिया है। वे यहां एक सेमिनार को संबोधित करने के लिए आने वाले थे। आमंत्रण एबीवीपी और छात्र संघ के हिंसक विरोध प्रदर्शन के बाद रद्द किया गया। वहीं जब जुलूस निकाल कर इसका इसका विरोध किया गया तो एबीवीपी ने पत्थर फेंके, सेमिनार कक्ष को बंद कर दिया गया, बिजली की आपूर्ति काट दी और छात्राओं और पत्रकारों से मारपीट की गई।

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