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झारखंड: मस्जिद में मुसलमानों पर हमला करने के बाद दंगाइयों ने की पुलिसकर्मियों को किडनैप करने की कोशिश

कोडरमा। रामनवमी जुलूस के दौरान गारमा गांव में मस्जिद के अंदर घुसकर इमाम सहित कई नमाज़ियों पर हमला करने वालों को पुलिस ने अभी तक गिरफ्तार नही किया है।

बता दें कि हिन्दू कट्टपंथियों ने रामनवमी के दिन मस्जिद से अज़ान न देने का फरमान सुनाया था जिसे न मानने पर उन्होंने मुसलमानों पर हमला कर दिया। इतना ही नहीं कट्टपंथियों ने इस हमले के बाद आरोपियों का पकड़ने गए पुलिसकर्मियों का अपहरण करने की भी कोशिश की थी।

इस मामले में पीस पार्टी के स्थानीय संयोजक मुस्तकीम सिद्दीकी का कहना है कि मस्जिद जुलूस के रास्ते पर नहीं है। यह सड़क से 50 फीट दूरी पर स्थित है। इसलिए इसकी वजह से जुलूस निकालने वालों को कोई परेशानी नहीं होनी चाहिए थी।

सिद्दीकी ने कहा कि घायल व्यक्तियों को शुरू में स्थानीय अस्पताल ले जाया गया था लेकिन बाद में डॉक्टर्स की सलाह पर उन्हें रांची इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस भेजा गया।

उन्होंने कहा कि हमले के बाद जब एक पुलिस दल दो आरोपियों को गिरफ्तार करने गांव पहुंचा तो कट्टपंथियों ने उनमें से दो का अपहरण करने की भी कोशिश की। और पुलिस को गांव से भागने पर मजबूर कर दिया।

इस मामले पर जमीयत उलेमा-ए-हिन्द के स्थानीय प्रतिनिधि ने कहा कि पहले उन्होंने मस्जिद निर्माण का कड़ा विरोध किया था लेकिन मुसलमानों ने फिर भी मस्जिद बना ली। जिसके बाद से ही सांप्रदायिक सोच रखने वाले हिंदू नाराज़ चल रहे थे।

हालाँकि कोडरमा के पुलिस अधीक्षक सुरेंद्र कुमार झा का कहना है कि मस्जिद के अंदर किसी मुसलमान पर कोई हमला नहीं हुआ है।

वहीँ कोडरमा के जमीयत की यूनिट के महासचिव मौलाना अबू बकर इस घटना की पुष्टि करते हैं। उन्होंने बताया कि हमलावर भगवा झंडे लिए मस्जिद के दरवाज़े पर पहुंचे और फिर ‘जय श्रीराम’ नारा लगाकर अंदर घुस गए थे।

कोडरमा के पुलिस प्रमुख झा ने इस घटना के लिए दोनों समुदायों पर आरोप लगाते हुए दावा किया कि हमलावरों के पास लोहे की छड़, तेज चाकू या तलवार जैसे हथियार नहीं थे।

झा ने कहा कि घटना के बाद चार मुस्लिम और तीन हिन्दुओं को सिविल अस्पताल में भर्ती कराया गया था। उनमें से छह अस्पताल से घर आ गए हैं, जबकि एक बुजुर्ग मुस्लिम का अब भी अस्पताल में इलाज चल रहा है। उन्होंने कहा कि दोनों पक्ष हिंसा का सहारा ले रहे हैं। फिलहाल अभी हम जांच कर रहे हैं।

गौरतलब है कि कोल गारमा गांव में फिलहाल 10-12 मुस्लिम परिवार रहते हैं। इसके अलावा चार परिवार ने पहले ही गांव छोड़ दिया है जबकि बाकी लोग अभी भी डर के साए में रह रहे हैं।

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