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मुस्लिम लॉ बोर्ड ने कोर्ट से कहा- निकाहनामा में तीन तलाक से जुड़ा एक नियम भी शामिल किया जाएगा

तीन तलाक पर छह दिनों तक चली सुनवाई के बाद सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में 18 मई को अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था।

अब इस मामले में आज ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड  ने सुप्रीम कोर्ट में एफिडेविट दाखिल किया। इसमें बोर्ड ने कहा कि वह कुछ नियमों की अडवाइजरी जारी करेगा, जो निकाह करने वालों को मानना होगा।

एफिडेविट में कहा गया कि शरियत और निकाहनामे में तीन तलाक एक गलत प्रथा है, ऐसे किसी प्रोविजन की इजाजत नहीं दी जानी चाहिए।

इसके अलावा एफिडेविट में मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने कहा कि वह काजी दूल्हा और दुल्हन को सलाह देंगे कि वे निकाहनामा में एक नियम जोड़ें कि वह तीन तलाक का सहारा नहीं लेंगे।

एएनआई की रिपोर्ट के मुताबिक मुस्लिम बोर्ड ने यह भी कहा कि वह तीन तलाक देने वालों के सामाजिक बहिष्कार का आह्वान भी करेगा।हालांकि इस एफिडेविट में सदियों पुरानी इस प्रथा को खत्म करने की बात नहीं कही गई है।

बता दें कि 17 मई को सुप्रीम कोर्ट ने आॅल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (एआइएमपीएलबी) से पूछा था कि क्या महिलाओं को ‘निकाहनामा’ के समय ‘तीन तलाक’ को ‘ना’ कहने का विकल्प दिया जा सकता है।

प्रधान न्यायाधीश जेएस खेहर की अध्यक्षता वाले पांच जजों के संविधान पीठ ने यह भी पूछा था कि क्या सभी काजियों से निकाह के समय इस शर्त को शामिल करने के लिए कहा जा सकता है।

 

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