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अखिलेश की एक दर्जन योजनाएं हो सकती हैं बंद

लखनऊ : वैसे अभी नयी सरकार का गठन नहीं हुआ है लेकिन इतना तय है कि अखिलेश यादव की महत्वाकांक्षी योजनाओ पर ब्रेक लग जायेगा। इनमे से कई योजनाओ ने खूब सुर्खियाँ बटोरी थी और बहुत लोकप्रिय भी रही थी।

उधर मुख्य सचिव राहुल भटनागर ने विभागीय मीटिंग बुला कर सभी वरिष्ठ अधिकारियो को निर्देश जारी कर दिए हैं कि भाजपा का संकल्प पत्र का अध्ययन कर लें और जिसके विभाग से जो भी सम्बंधित घोषणाएं है उनका प्रारूप तैयार कर लें।

ये प्रचलन भी हैं कि सरकार बदलने पर पुरानी योजनायें बंद हो जाती हैं लेकिन अब कोई भी पार्टी जनता की नाराज़गी मोल नहीं लेना चाहती इसीलिए बहुत योजनाओ का नाम बदल कर और थोड़ा बहुत बदलाव के साथ चालू रखी जाती हैं।

अब परेशानी ये हैं कि अखिलेश यादव ने सभी योजनाओ में समाजवादी शब्द लगा दिया हैं ऐसे में ये योजनायें या तो बंद कर दी जाएँगी या फिर इनका नाम बदला जायेगा।

कुछ मुख्य योजनायें जिनपर ग्रहण लग सकता है वो ये हैं :– समाजवादी किसान एवं सर्वहित बीमा योजना जिसमे किसानो को बीमा कराया जाता हैं, बुजुर्गो को तीर्थयात्रा पर भेजने के लिए समाजवादी श्रवन यात्रा, एनेमिक बच्चो के लिए कनाडा से मंगाए गए नमक को समाजवादी नमक वितरण कार्यक्रम के तहत बांटना, सबको साफ़ पानी उपलब्ध करने के लिए समाजवादी शुद्ध पेयजल योजना, बच्चो को पौष्टिक खाना देने के वास्ते समाजवादी पौष्टिक आहार वितरण योजना, युवाओ को रोज़गार देने के लिए व् युवा स्वरोजगार योजना, सबको स्वास्थ्य बीमा के लिए समाजवादी स्वस्थ्य बीमा योजना,समाजवादी बीमा केयर कार्ड, दस्तकारो के लिए समाजवादी हस्तशिल्प पेंशन योजना, सबको घर देने के लिए समाजवादी अफोर्डेबल हाउसिंग स्कीम, गाँव के विकास के लिए लोहिया ग्राम योजना और जनेश्वर ग्राम योजना।

इसके अलावा जिन दो योजनाओ पर सबसे ज्यादा नज़र हैं वे हैं–समाजवादी एक्सप्रेसवे जिसको लखनऊ से बलिया तक बनाना हैं और काफी पैसा भी खर्च हो गया है। लगभग साथ परसेंट ज़मीन का इन्तेजाम भी हो चुका है। इसको अब क्या किया जायेगा देखने वाली बात होगी।

दूसरी योजना जिसपर युवाओ की नज़र हैं वो है समाजवादी स्मार्टफोन योजना जिसके तहत एक करोड़ से अधिक रजिस्ट्रेशन हो चुके हैं। ये योजना सपा के घोषणा पत्र में शामिल हैं इसलिए अब इसका आगे चलने की उम्मीद कम है।

इसके अलावा बुंदेलखंड के लिए समाजवादी राहत सामग्री वितरण योजना पर भी सबकी नज़र है कि नयी सरकार इसको किस रूप में चलाती हैं।

  • फैसल फ़रीद

 

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