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अखिलेश की साइकिल से बदला लेने के चक्कर में योगी सरकार ने गरीबों की सुरक्षा ताख पर रखी

यूपी में बीजेपी और समाजवादी पार्टी में अब एक नई रार ठन गई है। वजह है साइकिल। दरअसल सीएम आदित्यनाथ पूर्व सीएम और समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव की सरकार के कार्यकाल में यूपी की सड़कों पर बनाए गए साइकिल पथों को तोड़ना चाहते हैं। योगी सरकार का कहना है कि इससे राज्य की सड़कें संकरी हो गई है।

उधर, अखिलेश यादव ने सरकार के इस कदम को चुनौती देते हुए कहा है उनकी पार्टी सड़क दुर्घटना में मारे गए किसी भी व्यक्ति के परिवार वालों को दस लाख रुपये देगी।

अखिलेश यादव का कहना है उन्होंने राज्य में सड़कों के निर्माण के दौरान साइकिल पथ का निर्माण इसलिए कराया था कि इससे साइकिल सवार सुरक्षित यात्रा कर सकें।

इसके अलावा साइकिल पर्यावरण अनुकूल है। इससे प्रदूषण नहीं होता और सड़कें टूट-फूट से बची रहती हैं। राज्य को प्रदूषण नियंत्रण और सड़कों की टूट-फूट पर बड़ी रकम खर्च करनी पड़ती है। यह रकम विकास कार्यों में लगाई जा सकती है।

लेकिन योगी सरकार इसे सड़कों पर आवागमन की बाधा के तौर पर देख रही है। हालांकि यूपी में जनता साइकिल पथ और साइकिल के पक्ष में दिख रही है। पर्यावरणवादी भी अखिलेश के साथ हैं।

पर्यावरणवादियों और सड़क विशेषज्ञों का कहना है कि साइकिल पथ साइकिल चालकों को सुरक्षित यात्रा का विकल्प देता है। इसके अलावा साइकिल का इस्तेमाल करने वालों में ज्यादातर कमजोर और निम्न आय वर्ग के लोग होते हैं।

बड़े पैमाने पर फैक्टरियों में काम करने वाले मजदूर, छात्र-छात्राएं, फेरी लगाने वाले, किसान, नौजवान साइकिल से अपनी मंजिल पर पहुंचते हैं। राज्य की सड़कों पर जिस तरह वाहनों का दबदबा है और बड़ी गाड़ियों का आतंक है उससे साइकिल सवारों की दुर्घटनाओं की आशंका बनी रहती है।

यही वजह है पूर्व सीएम अखिलेश यादव ने उनकी सुरक्षित यात्रा सुनिश्चित कराने के लिए साइकिल पथ का निर्माण कराया था।

बहरहाल, साइकिल पथ को तोड़ने के योगी सरकार के कदम का विरोध शुरू हो गया है। साइकिल की सवारी करने वाली आबादी का एक बड़ा वर्ग इस कदम के खिलाफ है।

 

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