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इफ़्तार प्रोग्राम में एक साथ आया अखलाक, पहलू और नजीब का परिवार, बताई नाइंसाफ़ी की कहानी

केंद्र में मोदी सरकार आने के बाद देश में बने नफ़रत के माहौल ने मुसलमानों में बेचैनी पैदा कर दी है। यह बेचैनी है दहशत की जो आए दिन हो रही हिंसात्मक घटनाओं से और गहरी होती चली जा रही हैं।

इस बीच बुधवार को स्टूडेंट इस्लामिक ऑर्गेनाईजेशन ऑफ इंडिया के रोजा इफ्तार कार्यक्रम में दादरी में मारे गए अखलाक के भाई जान मुहम्मद ने कुछ ऐसा कहा जिससे मुसलमानों के भीतर समाए डर का अंदाजा लगाने के लिए काफ़ी है।

जान मुहम्मद ने कहा कि अब शेर से नहीं, गाय से डर लगता है’।  उन्होंने कहा कि अख़लाक़ की मौत के बाद से दादरी के बिसहड़ा गांव से कई मुस्लिम परिवार पलायन कर चुके हैं।’

जान मुहम्मद बताया कि जिस तरह गौरक्षा के नाम पर अल्पसंख्यकों पर हमले हो रहे हैं उसके बाद अब शेर से डर नहीं लगता है। बल्कि अगर कोई गाय पीछे से भी निकल जाए तो डर लग जाता है।

उन्होंने आगे कहा कि जान मुहम्मद के मुताबिक उसके भाई के ऊपर हमला सोची समझी साजिश के तहत किया गया। उस वारदात का डर अब तक बिसहड़ा के मुस्लिम परिवारों के ज़हन में ताजा है।

इस इफ़्तार प्रोग्राम में जान मुहम्मद के अलावा पहलू खान और नजीब का परिवार भी शामिल हुआ। पहलू खान के बेटे इरशाद के मुताबिक उसके पिता की मौत के इतने दिन गुज़र जाने के बाद भी अब तक प्रशासन की तरफ से कोई उनसे मिलने नहीं आया और ना ही कोई मुआवजा दिया गया। उल्टा प्रशासन ने पशु क्रूरता कानून के तहत उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज कर दिया।

इस दौरान नजीब की मां ने कहा कि सरकार से एक बार उनके बेटे को तलाशने की अपील की। उन्होंने कहा कि 9 संदिग्ध छात्रों में से अब तक पुलिस ने किसी को गिरफ्तार नहीं किया।

पहलू खान के पड़ोसी अज़मत खान भी इस प्रोग्राम में शामिल हुए। अज़मत को भी बड़ी बेरहमी से गौ-रक्षकों की शक्ल में आये गुंडों ने पीटा था। उनकी रीढ़ की हड्डी में गंभीर चोट आई थीं और उनका इलाज दिल्ली के अस्पताल में चल रहा है।

 

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