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सिर्फ़ मुसलमानों का डी-रेडिकलाइज़ेशन करने का यूपी ATS का ऐलान शर्मनाक: अमीक जामेई

आतंकी गतिविधियों में संलिप्त या झुकाव रखने वाले युवाओं को बचाने में लिए शुरू किए गए यूपी एटीएस के प्रोजेक्ट ‘घर वापसी’ पर विवाद शुरू हो गया है। इस पर ‘संविधान बचाओ देश बचाओ’ अभियान के सदस्य अमीक जामेई ने ट्विटर पर कड़ी आपत्ती ज़ाहिर की है।

अमीक जामेई ने ट्वीट किया कि यूपी पुलिस का डि-रेडिकलाइज़ेशन प्रोजेक्ट जिसे संघ के प्रोजेक्ट “घर वापसी” का नाम दिया गया है, सिर्फ मुसलमानो पर ही केंद्रित क्यों हैं?…इसमें हिंदुत्व टेररिस्ट, समझौता ब्लास्ट के आरोपियों और अभिनव भारत जैसे आतंकी संगठन को छूट क्यों दी गई है?

उन्होंने कहा कि एटीएस मेडल का खेल खेलने के साथ सैकड़ों जिंदगियां बर्बाद कर चुकी है। अब क्या चाहिए?  ईमानदारी से इस प्रोजेक्ट को करिये, हम सब साथ देंगे! भेदभाव ठीक नही!

इस मामले में अमीक जामेई ने सियासत से बताया कि उत्तर प्रदेश एटीएस पहले से ही संदेह के घेरे में रही है। उनके अनगिनत केस में पहले आतंक का हव्वा बनाया जाता है।

ऐसे कई मामले में है जिसमे मुसलमान आरोपियों का मीडिया ट्रायल किया गया, समाज में उनके खिलाफ नफ़रत फैलाई गई, फिर सालों बाद सबूत के आभाव में इन युवकों को कोर्ट ने बरी कर दिया।

उन्होंने पूछा कि क्या उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री बेगुनाहों की ज़िन्दगी बर्बाद करने वाले अफसरों को जेल भेजेंगे?…फर्जी मामलों में मिले मेडल वापस लेंगे?

दरअसल आतंक के मामलो में पुलिस को ट्रेनिंग की ज़रुरत है, इन्हें भारतीय मुसलमानों के बारे में कुछ पता नहीं है।

अमीक जामेई ने कहा कि मालेगांव से लेकर समझौता बम ब्लास्ट में शामिल युवा और संलिप्त आर्मी अफसर भी हमारे देश के नागरिक हैं। साध्वी प्रज्ञा एबीवीपी की नेता रही हैं। हमें इनकी भी ‘घर वापसी’ की कोशिश करनी चाहिए।

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