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AMU अल्पसंख्यक मामला: केंद्र के हलफनामे पर चार सप्ताह में जवाब देगा AMU

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी को केंद्र के उस हलफनामे का जवाब देने के लिए चार हफ्ते का समय दिया है, जिसमें मोदी सरकार ने यूपीए सरकार की ओर से दाखि‍ल याचिका वापस लेने का निर्णय किया है. यूपीए सरकार ने अलीगढ़ यूनिवर्सिटी को अल्पसंख्यक संस्थान नहीं बताने वाले फैसले को चुनौती दी है.

सोमवार को जस्टिस जेएस खेहर की अदालत में यूनिवर्सिटी के वकील पीपी राव ने केंद्र के हलफनामे का जवाब देने के लिए कुछ समय की मांग की थी, जिसे कोर्ट ने स्वीकार कर लिया. कोर्ट ने अपने फैसले में कहा, ‘यूनिवर्सिटी काउंसिल सरकार के हफलनामे का जवाब देने के लिए समय चाहती है, लिहाजा उसे 4 हफ्ते का समय दिया जाता है.’

गौरतलब है कि इससे पहले बीते गुरुवार को केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में कहा है कि वह इलाहाबाद हाई कोर्ट के फैसले को चुनौती देने वाली पिछली सरकार की अपील को वापस लेगी. अटॉर्नी जनरल मुकुल रोहतगी ने कहा, ‘हमने (सरकार ने) एक हलफनामा दाखिल किया है, जिसमें कहा है कि हम अपील को वापस लेंगे.’ उन्होंने कहा कि केंद्र ने इस संबंध में सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दाखिल कर दिया है. यूनिवर्सिटी प्रशासन ने भी इस मुद्दे पर हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ एक अलग याचिका दाखिल की थी.

रोहतगी ने गुरुवार को कोर्ट से कहा, ‘एएमयू अल्पसंख्यक संस्थान नहीं है.’ उन्होंने 1967 के शीर्ष अदालत के एक फैसले का उल्लेख किया, जिसमें कहा गया है कि यह अल्पसंख्यक संस्थान नहीं है क्योंकि सरकार ने इसकी स्थापना की थी, मुस्लिमों ने नहीं.

पहले भी शीर्ष विधि अधिकारी ने सुप्रीम कोर्ट में कहा था कि एक केंद्रीय कानून के तहत अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी की स्थापना की गई थी. साथ ही 1967 में अजीज बाशा मामले में पांच न्यायाधीशों की एक संविधान पीठ ने कहा था कि यह एक केंद्रीय विश्वविद्यालय है और अल्पसंख्यक संस्थान नहीं है.

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