Wednesday , August 23 2017
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AMU बीफ मामला: पुलिस को जांच में गोमांस होने के कोई सुबूत नहीं मिले:

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यूपी पुलिस ने कहा कि उन्हें अपनी शुरुआती जांच के दौरान अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (AMU) परिसर में गाय का मांस होने से जुड़ा कोई सबूत नहीं मिला। बीजेपी ने इल्जाम लगाया था कि AMU की कैंटीन में अभी भी बीफ खिलाया जा रहा है। इसके बाद पुलिस ने इन इल्ज़ामो की जांच की थी। अब पुलिस द्वारा कैंटीन में बीफ परोसने जाने संबंधी किसी सबूत के ना मिलने की बात से अलीगढ़ शहर की मेयर शकुंतला भारती भड़क गई हैं। भारती बीजेपी की नेता हैं। उन्होंने धमकी दी है कि ‘अगर उन्हें अपने जान की कीमत देकर भी’ यूनिवर्सिटी में घुसना पड़ेगा, तो वह घुसेंगी।

बीजेपी और विश्व हिंदू परिषद के कुछ यहां के नेताओं ने भारती के नेतृत्व में यह इल्जाम लगाया था। इस मामले में अभी तक कोई एफआईआर दर्ज नहीं की गई है। शहर के एसपी अंशुल गुप्ता ने साफ करते हुए बताया, ‘शुरुआती जांच में हमें कोई सबूत नहीं मिला है। जांच अभी चल रही है।’ उधर, AMU ने शनिवार को अपने ऊपर लगे इल्ज़ामो पर सफाई देते हुए कहा था कि उसकी कैंटीन के मेन्यू में जिस ‘बीफ बिरयानी’ का जिक्र किया गया है, वह असल में ‘भैंस के गोश्त की बिरयानी’ है। उन्होंने कहा कि सूबे में गाय के गोश्त पर प्रतिबंध होने के कारण ही वहां भैंस के मांस का इस्तेमाल किया जाता है। मालूम हो कि अंग्रेजी में बीफ के मांस का मतलब गाय और भैंस, दोनों का ही मांस होता है।

सावधानी बरतते हुए AMU ने फिलहाल जे.एन. मेडिकल कॉलेज की कैंटीन के मेन्यू से ‘बीफ बिरयानी’ हटा दिया है। कुछ दक्षिणपंथी संगठनों ने इसी मेन्यू बोर्ड की तस्वीरों को वॉट्सऐप पर शेयर कर के इस विवाद को हवा दी थी।

बीजेपी और वीएचपी के लोग पुलिस की इस जांच से संतुष्ट नहीं हैं। उन्होंने इस मामले में एफआईआर दायर किए जाने की मांग की है। मेयर भारती ने हमसे कहा, ‘इस तरह की जांच को सहन नहीं किया जाएगा। मैं साबित कर दूंगी कि AMU परिसर के कैंटीन मेन्यू में बीफ बिरयानी थी।’ पुलिस की जांच पर सवाल खड़े करते हुए उन्होंने कहा, ‘क्या जांच करने का यह तरीका है? दोषियों को सावधान कर दिया गया, अब वे किस बात की जांच करेंगे।’

बाद में मेयर भारती खुद एसएसपी के दफ्तर पहुंची और उन्होंने मांग की कि जिस किसी को भी गाय का मांस बेचते हुए पकड़ा जाए, उसके खिलाफ एफआईआर दर्ज हो। वीएचपी के नेता राम कुमार ने भी धमकी दी कि अगर एफआईआर दर्ज नहीं होता, तो वे विरोध प्रदर्शन करेंगे। उन्होंने कहा कि वीएचपी ने इस मसले पर आंदोलन शुरू करने का फैसला किया है। अगले 24 घंटे के समय को अहम माना जा रहा है। उन्होंने कहा कि अगर पुलिस एफआईआर दर्ज नहीं करती, तो वे लोग प्रशासन पर कार्रवाई करने का दबाव बनाएंगे। इस मुद्दे को आधार बनाकर AMU और पूरे अलीगढ़ जिले में गाय का मांस बेचने और खाने को रोका जाएगा।

AMU के प्रॉक्टर मोहसिन खान ने कहा, ‘किसी भी चीज को हमारे खिलाफ इस्तेमाल किया जा सकता है। हम देख रहे हैं कि देश के बाकी युनिवर्सिटी परिसरों में क्या-क्या हो रहा है। मैंने कैंटीन चलाने वालों को कह दिया है कि उन्हें इस बात का जिक्र करने की कोई जरूरत नहीं कि कौन सा मांस परोसा जा रहा है। हम बस लिखेंगे कि कोरमा है, दाल है और सब्जी है।

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