Wednesday , June 28 2017
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SC का सरकार से तीखा सवाल, कोर्ट ने हिंदुओं की किस कुरीति को ख़त्म कराया?

नई दिल्ली: तीन तलाक मामले का सुनवाई कर रही संविधान पीठ ने आज एक ऐसा सवाल किया जिसको सुनते ही अटॉर्नी जनरल के पैरों तले जमीन खिसक गयी। सुप्रीम कोर्ट ने सरकार से पूछा कि हिन्दू समाज में प्रचलित किस कुरीति को खत्म करने के लिए कोर्ट ने आदेश दिए।

दरअसल कोर्ट ने ये तीखा सवाल उस समय किया जब केंद्र सरकार का सुप्रीम कोर्ट में पक्ष रख रहे अटॉर्नी जनरल मुकुल रोहतगी ने बहस के दौरान कहा कि सती प्रथा और देवदासी प्रथा भी कभी हिन्दू धर्म का हिस्सा थे, लेकिन आज समाज इन्हें छोड़कर आगे बढ़ चुका है।

रोहतगी का तर्क था कि सर्वोच्च न्यायालय सती प्रथा की तरह तीन तलाक को भी समाज के खिलाफ मानते हुए इसके खिलाफ आदेश दे जिससे मुस्लिम महिलाओं के हितों की सुरक्षा सम्भव हो सके।

11 मई से तीन तलाक का सुनवाई कर रही कोर्ट इसके सभी पहलुओं को समझने की कोशिश कर रही है। कोर्ट ने मामले की सुनवाई शुरू करने के दौरान ही ये कहकर सबको सन्न कर दिया था कि वह सबसे पहले यह देखना चाहेगा कि तीन तलाक इस्लाम का मूल हिस्सा है भी या नहीं, और क्या उसे इस मामले में सुनवाई का अधिकार है।

सुप्रीम कोर्ट के इसी रुख को ध्यान में रखते हुए ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के वकील कपिल सिब्बल इस बात को लगातार उठा रहे हैं कि इस मामले को इस्लाम धर्म के मूल का हिस्सा माना जाना चाहिए और अदालत को इस मामले की सुनवाई नहीं करनी चाहिए।

वहीं सरकार ने तमाम तर्क दे यही साबित करने की कोशिश की है कि ये मामला इस्लाम धर्म का हिस्सा नहीं है और यह केवल परम्पराओं में चला आ रहा है। इसलिए आज के समय के हिसाब से आधुनिकता को ध्यान में रखते हुए तीन तलाक को खत्म करना चाहिए।

सरकार ने इसके लिए तमाम मुस्लिम मुल्कों में तीन तलाक को खत्म किये जाने का उदाहरण भी दिया और कहा कि जब मुस्लिम मुल्कों में इस ‘कुप्रथा’ को खत्म किया जा सकता है और वहां इस्लाम उसके बीच बाधा नहीं बना तो ऐसा भारत में क्यों नहीं किया जा सकता।

तीन तलाक को खत्म करने को लेकर 11 मई से शुरु हुई सुनवाई पूरी हो चुकी है और सुप्रीम कोर्ट ने अपना फ़ैसला सुरक्षित रख लिया है ।

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