Friday , September 22 2017
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दलित और साबुन से डरा एक मुख्यमंत्री

योगी के यूपी में लखनऊ प्रेस क्लब अब राज्य पुलिस और सरकार के हाथों का खिलौना बन गया है। वरिष्ठ दलित कार्यकर्ताओं द्वारा बीजेपी के नेतृत्व वाली वर्तमान राज्य सरकार की दलित विरोधी नीतियों के खिलाफ एक कार्यक्रम प्रेस क्लब में आयोजित किया जाना निर्धारित था जिसे रद्द करवा दिया गया। दलित अधिकार के कार्यकर्ताओं का कार्यक्रम 3 जुलाई को दोपहर के समय होना था।

प्रेस कांफ्रेंस के लिए रिजर्वेशन की प्रक्रिया दस-बारह दिन पहले हो गई थी। सोमवार को जब दलित कार्यकर्ताओं पूर्व आइपीएस अधिकारी और आइजीपी एसआर दारापुरी, राम कुमार, रमेश दीक्षित, आशिष अवस्थी, पीके यादव, पीसी कुरील, केके वत्स लखनऊ के कैसरबाग आयोजन स्थल पहुंचे तो करीब पांच सौ पुलिस वालों ने इमारत को घेर लिया। इन पुलिस वालों में पीएसी के भी जवान थें। पुलिस वालों ने जबरन कहा कि कार्यक्रम रद्द कर दिया गया है। सिटी एसपी त्रिपाठी अपने पूरे अमला और वरिष्ठ अधिकारियों के साथ आयोजन स्थल पर मौजूद थें। त्रिपाठी ने आयोजन स्थल से कार्यकर्ताओं के जाने के बारे में जानकारी मांगी। सभी वरिष्ठ कार्यकर्ताओं के प्रेस क्लब परिसर के अंदर से गिरफ्तार कर लिया गया। प्रेस क्लब के प्रतिनिधि जोशी से सबरंगइंडिया ने बात करने की कोशिश की लेकिन नहीं बात हो सकी। वर्तमान में लखनऊ प्रेस क्लब के अध्यक्ष जोहरू तिवारी हैं।

दारापुरी ने सबरंगइंडिया से बात करते हुए कहा कि योगी सरकार की कार्रवाई से मौलिक मानवाधिकार और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का हनन हुआ है। उन्होंने आगे कहा कि यह चौंकाने वाला है कि हमलोगों को परिसर के अंदर से गिरफ्तार किया गया और सबसे ज्यादा बुरा तब हुआ जब प्रेस क्लब पर दबाव डाला गया। दारापुरी ने कहा कि ये चिंता की बात है कि पुलिस ने प्रेस क्लब पर धारा 144 लगाने का दबाव बनाया जबकि ये धारा खुले स्थान पर लोगों के जमा होने से रोकने के चलते लगाया जाता है। प्रेस क्लब एक हॉल है और यहां धारा 144 लगाने का कोई अर्थ ही नहीं है।

वरिष्ठ राजनीतिक कार्यकर्ता रमेश दीक्षित ने कहा कि पुलिस की तरह प्रेस क्लब की कार्रवाई बेहद खतरनाक है।

लखनऊ के पूर्व कुलपति रूपरेखा वर्मा ने कहा कि साबुन को लेकर हमारे सीएम भयभीत हैं। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार की इस चाल का उजागर करना है। यह सब साबुन का खेल है। वर्मा ने कहा कि गुजरात से 125 किलो का साबुन लेकर आ रहे दलित समाज के लोगों को झांसी स्टेशन पर गिरफ्तार करवाया और अब ये प्रेस क्लब की घटना हुई। उन्होंने आगे कहा कि ‘ये तानाशाही जैसा है। अगर प्रेस कांफ्रेंस का स्थान राज्य सरकार का सांस्कृतिक केंद्र हो जाए तो अधिकारियों की प्रतिक्रिया को समझा जा सकता है। लेकिन तथ्य यह है कि यह चौथे खंभे का स्थान है, जिसका मतलब है कि लोकतंत्र का पहरेदार बनना जो अब एक तानाशाही शासन के साथ संलिप्त है। अब वह भयावह बनाता जा रहा है। ऐसा हिटलर के शासन के वक्त भी नहीं हुआ था। क्या मुख्यमंत्री हम जैसे कार्यकर्ताओं से भयभीत हो गए हैं? हम इस वक्त खुद को बहुत शक्तिशाली महसूस कर रहे हैं।’

वरिष्ठ कार्यकर्ता राम कुमार ने कहा कि तथ्य यह है कि हमलोग प्रदर्शन के लिए इकट्ठा नहीं हुए थे बल्कि वर्तमान समय में भारत में दलितों की स्थिति पर चर्चा के लिए जमा हुए थे। यह वाकई में चौकाने वाला है कि चर्चा के लिए जमा होने पर इस तरह की कार्रवाई की गई। गुजरात से आ रहे दलितों को हिरासत में लिया गया और प्रशासन द्वारा उनके 125 किलोग्राम साबुन जब्त कर लिया गया। राम कुमार ने आगे कहा कि सफाई के लिए साबुन मुख्यमंत्री तक पहुंच जाए।

लखनऊ के प्रेस क्लब में सोमवार को पूर्व आइजीपी एसआर दारापुरी समेत दलित आधिकार के कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी बेहद चिंताजनक है। इसमें प्रेस क्लब की भूमिका लोकतंत्र के चौथे खंभे के रूप में चौंकाने वाले हैं। ऐस तब हुआ जब यूपी के मुख्यमंत्री योगी के लिए दलित गुजरात से साबुन ला रहे थें।

साभार- सबरंगइंडिया 

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