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महाराष्ट्र: क़र्ज़ माफ़ी का ऐलान धोखा है, PM मोदी के झूठे वादे और झांसे से खफा हैं किसान

महाराष्ट्र के किसान पीएम नरेंद्र मोदी के झूठे वादे से बेहद खफा हैं। विदर्भ में 2014 में लोकसभा चुनाव अभियान के दौरान आए पीएम ने फसलों की ज्यादा कीमत दिलाने का वादा किया था। लेकिन किसानों को फसल की आधी कीमत भी नहीं मिली।

महाराष्ट्र के किसानों के लिए कर्ज माफी का ऐलान हो चुका है। लेकिन उनके लिए इतना ही काफी नहीं है। सभी किसान कर्ज माफी के दायरे में नहीं आएंगे। न्यूनतम समर्थन मूल्य की नीति सिर्फ 28 कृषि उत्पादों पर लागू होती है।

फल और सब्जियों की खेती करने वाले एमएमसपी के दायरे से बाहर है। महाराष्ट्र के किसान अब फलों और सब्जियों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य की गारंटी देने की मांग कर रहे हैं।

नासिक जिले के अंगूर किसानों का कहना है उनके लिए एमएसपी की नीति न होने की वजह से पिछले साल उन्हें अंगूर दस रुपये प्रति किलो तक बेचने को मजबूर होना पड़ा। इससे जिन लोगों ने कर्ज लेकर अंगूर की खेती की थी वे और कर्ज में डूब गए।

किसानों का कहना है कि प्रति किलो अंगूर की लागत ही 40 रुपये आई थी। यानी एक किलो अंगूर बेचने में 30 रुपये का घाटा उठाना पड़ रहा था। किसानों का कहना है कि कम से कम 40 रुपये प्रति किलो अंगूर की एमएसपी तय कर दी जाती तो उन्हें गहरे कर्ज की मुसीबत में नहीं पड़ना पड़ता।

महाराष्ट्र के किसान पीएम नरेंद्र मोदी के झूठे वादे से बेहद खफा हैं। विदर्भ के एक किसान ने कहा कि 2014 में लोकसभा चुनाव अभियान के दौरान आए पीएम ने फसलों की ज्यादा कीमत दिलाने का वादा किया था।

उन्होंने कहा था कि एमएसपी फसल उत्पादन की कम से कम 50 फीसदी लागत को ध्यान में रख कर तय की जाएगी। उस साल बाजार में अरहर की कमी थी इसलिए किसानों ने इसकी ज्यादा खेती की ताकि कीमत ज्यादा मिले। लेकिन प्रति क्विंटल अरहर की कीमत 5050 रुपये तय की गई। उम्मीद थी कि कम से कम 6000 रुपये की कीमत मिलेगी।

क्योंकि इसके पिछले साल 9000 रुपये की एमएसपी मिली थी। एक किसान ने कहा कि उसने अरहर की खेती कि लिए एक लाख रुपये का कर्ज लिया था। अगर अच्छी कीमत मिलती तो कर्ज चुका देते। कई किसानों ने मोदी के वादे पर भरोसा कर कपास के ऊपर अरहर को तवज्जो दी।

लेकिन वादे के मुताबिक अरहर की कीमत न मिलने से कर्ज से निकालने का उसका सपना टूट गया।

यही हाल प्याज की खेती करने वालों का रहा। एक किसान ने बताया का प्रति एकड़ प्याज की खेती की लागत ही 40000 रुपये आई थी लेकिन फसल बेच कर प्रति एकड़ 16000 रुपये मिल पाए। किसानों को प्याज एक से तीन रुपये किलो बेचना पड़ा।

नेशनल क्राइम रिकार्ड ब्यूरो के मुताबिक महाराष्ट्र में 1995 से 2013 के बीच 60,750 किसान आत्महत्या कर चुके हैं। अगर वादे इसी तरह टूटते रहे तो देश की कृषि भूमि को श्मशान भूमि बनने में देर नहीं लगेगी।

साभार- सबरंग

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